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बंजर, खादर जमीन को उपजाऊ बनाने में मिली कामयाबी
नई दिल्ली/विजय गुप्ता
Updated Tue, 08 Jan 2013 10:10 PM IST
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सूखाग्रस्त क्षेत्रों में धान की फसल लहलहाने वाले कृषि वैज्ञानिकों ने अब बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने की तकनीक विकसित की है। अंजन घास के जरिए वैज्ञानिक न सिर्फ बंजर और खादर जमीन को हरा-भरा बना रहे हैं बल्कि इन जमीनों को चरागाह में विकसित करने में लगे हैं।
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देहरादून के केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान के वैज्ञानिकों ने गुजरात के आणंद में अंजन घास और बांस के पौधे लगाकर बंजर और खादर जमीन को बड़े चरागाह में बदलने का कारनामा किया है।
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कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री डॉ. चरणदास महंत ने बताया कि गुजरात में डेयरी बड़े उद्योगों में से एक है। यहां पर चारे की मांग में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। इससे चारे की निरंतर और नियमित आपूर्ति के लिए सीमांत और बंजर भूमि पर दबाव है।
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खादर भूमि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक स्वदेशी तकनीक देहरादून स्थित केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान ने विकसित की है। संस्थान ने खादर भूमि की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए बांस और अंजन घास आधारित वन चारागाह प्रणाली विकसित की है।
इसके तहत अनुत्पादक खादर भूमि को बांस रोपण के जरिए उपजाऊ बनाया जाता है। यह तकनीक अधिक लाभदायक है और पानी के कटाव को रोकती है। इससे खादर भूमि पर मिट्टी के बहाव को रोकने में सहायता मिलती है।
इसके अलावा खादर भूमि पर बांस के पौधो का रोपण न केवल आजीविका के लिए सहायक है। बल्कि यह प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और लंबे समय में कार्बन जब्ती में भी मदद करता है। इस तकनीक से गुजरात के लगभग एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र की बंजर भूमि को बड़े चरागाह में बदला जा चुका है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक खादर में बांस की बुवाई और घास रोपण की लागत लगभग 22000 रुपये प्रति हेक्टेयर है। प्रारंभिक वर्षों के दौरान अंजन घास का हरा चारा खादर भूमि से काटा जा सकता है। इससे किसानों को प्रति हेक्टेयर पर 3000 से 6000 रुपये की दर से आय होती है।
एक दफा लगाने के बाद अंजन घास को पांच साल तक काटा जा सकता है। खादर भूमि उसे कहते हैं जो घाटी की तुलना में संकरी और अक्सर धारा के कटाव से बनता है। देश में मौजूदा समय में 3.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र खादर भूमि है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 1.12 फीसदी है। गुजरात में खादर भूमि 40000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है।