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बंसल, अश्वनी के बाद क्या अब मनमोहन की बारी है?

Sat, 11 May 2013 09:32 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क Updated Sat, 11 May 2013 09:32 AM IST
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bansal ashwani resignation bjp target manmohan

भ्रष्टाचार के मामले में रेल मंत्री पवन कुमार बंसल की विदाई और कोयला घोटाले की स्टेटस रिपोर्ट को लेकर कानून मंत्री अश्वनी कुमार के इस्तीफे के बाद अब विपक्ष प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर हमले तेज कर सकता है।

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कोयला मंत्रालय की जांच रिपोर्ट बदलवाने में पीएमओ की भी भूमिका बताई जा रही है, ऐसे में भाजपा पीएम के इस्तीफे की मांग तेज कर सकती है।

भाजपा का आरोप है कि प्रधानमंत्री को बचाने के लिए सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट बदली गई क्योंकि कोयला मंत्रालय प्रधानमंत्री के पास ही था।

प्रधानमंत्री की छवि पर लगा दाग
बेहद ईमानदार कहे जाने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की छवि पर शुक्रवार को बड़ा दाग लग गया, जब उनकी कैबिनेट के दो भारीभरकम मंत्रियों को आरोपों के चलते एक घंटे के अंदर अपने इस्तीफे देने पड़े।
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माना जा रहा है कि देश में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जब सरकार के दो बड़े मंत्रियों की इस तरह विदाई हुई है।

सोनिया को क्रेडिट देने की रणनीति
दोनों मंत्रियों का इस्तीफा कराने की प्रक्रिया में तब तेजी आई जब शुक्रवार को सोनिया गांधी प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचीं। इसे दागी मंत्रियों को हटाने का क्रेडिट सोनिया को देने की कांग्रेस की सोची समझी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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कांग्रेस की ओर से संदेश दिया जा रहा है कि आरोपों से घिरे दोनों मंत्रियों को सरकार में बनाए रखने से सोनिया बिल्कुल खुश नहीं थीं, जबकि मनमोहन सिंह अश्वनी कुमार को बचाना चाहते थे। लेकिन सोनिया के दबाव के चलते दोनों मंत्रियों को हटाया गया।


'देर से हुआ इस्तीफा'
बंसल का इस्तीफा बहुत देरी से लिया गया। यदि सरकार पहले ही हमारी मांग मान लेती तो संसद का कीमती वक्त बर्बाद नहीं होता। हमें उम्मीद है कि रेल घूसकांड की अब जांच सही तरह से हो पाएगी।--शाहनवाज हुसैन, भाजपा।

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