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गुटखे पर बैन से यूपी को होगा 200 करोड़ का घाटा
लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Sep 2012 03:03 PM IST
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हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 14 दिन की गुटखे पर पाबंदी लगाने
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का समय दिया है। ऐसे में 20 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में भी गुटखे
पर प्रतिबंध लगाने के लिए राज्य सरकार को हिम्मत जुटानी ही होगी। इसके लिए
सरकार को गुटखा बनाने वाली कंपनियों की लॉबी के दबाव से बाहर तो आना ही
होगा साथ ही सालाना 200 करोड़ रुपये के राजस्व का मोह भी छोड़ना होगा।
यूपी में गुटखे पर प्रतिबंध लगाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इसके लिए 13 सितंबर फिर 17 सितंबर को बैठक तो बुलाई गई, लेकिन दोनों बार बैठकें टाल दी गईं। सूत्रों की मानें तो बैठकें गुटखा कंपनियों के दबाव में टाली गई हैं। अब अगली बैठक 27 सितंबर को होगी।
इस बैठक में सरकार को गुटखे के प्रतिबंध पर फैसला लेना ही होगा। ऐसा न करने पर कोर्ट ने अपनी ओर से कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। राज्य सरकार के पास 2 अक्तूबर तक का समय है।
इसलिए नहीं लग पा रहा है प्रतिबंध
गुटखे पर वैट से यूपी सरकार को सालाना 200 करोड़ रुपये की आय होती है। फिलहाल प्रदेश में गुटखे पर 30 प्रतिशत वैट लिया जा रहा है जबकि पहले 50 प्रतिशत वैट और एक प्रतिशत प्रवेश कर लेने का प्रावधान किया गया था। गुटखा लॉबी के दबाव में इसे लागू नहीं किया जा सका और इसे वैट 30 प्रतिशत कर दिया गया। एक प्रतिशत प्रवेश कर भी समाप्त कर दिया गया।
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में गुटखे का सालाना कारोबार 1800 से 2000 करोड़ रुपये का है जबकि जानकार बताते हैं कि सालाना कारोबार 3000 से 4000 करोड़ रुपये का है। इसका एक मोटा हिस्सा ‘ऊपर’ तक पहुंचाया जाता है। इसी वजह से गुटखे पर प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है।
1100 गुटखा मशीनें
यूपी में 1000 से 1100 के आसपास गुटखा बनाने वाली मशीनें हैं। एक मशीन से 19 लाख रुपये महीने उत्पाद शुल्क लिया जाता है। पान मसाला व्यापार मंडल के अध्यक्ष बलराम मौर्य कहते हैं कि यूपी में एक अनुमान के मुताबिक 2 अरब 90 करोड़ रुपये के आसपास उत्पाद शुल्क गुटखा मशीनों से प्रति माह जमा कराया जा रहा है।
कब कहां लगा प्रतिबंध
गोवा 2 अक्तूबर 2005, मध्य प्रदेश 1 अप्रैल 2012 , केरल 25 मई, बिहार 30 मई, हिमाचल प्रदेश 13 जुलाई, राजस्थान 18 जुलाई, महाराष्ट्र 20 जुलाई, छत्तीसगढ़ व झारखंड 24 जुलाई, हरियाणा 15 अगस्त, दिल्ली व गुजरात 11 सितंबर, पंजाब 26 अगस्त, मिजोरम इसी माह। जबकि आंध्र प्रदेश, असम, चंडीगढ़, तमिलनाडु और ओडिशा में प्रतिबंध लगाने की तैयारी है।
यूपी में गुटखे पर प्रतिबंध लगाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इसके लिए 13 सितंबर फिर 17 सितंबर को बैठक तो बुलाई गई, लेकिन दोनों बार बैठकें टाल दी गईं। सूत्रों की मानें तो बैठकें गुटखा कंपनियों के दबाव में टाली गई हैं। अब अगली बैठक 27 सितंबर को होगी।
इस बैठक में सरकार को गुटखे के प्रतिबंध पर फैसला लेना ही होगा। ऐसा न करने पर कोर्ट ने अपनी ओर से कार्रवाई करने की चेतावनी दी है। राज्य सरकार के पास 2 अक्तूबर तक का समय है।
इसलिए नहीं लग पा रहा है प्रतिबंध
गुटखे पर वैट से यूपी सरकार को सालाना 200 करोड़ रुपये की आय होती है। फिलहाल प्रदेश में गुटखे पर 30 प्रतिशत वैट लिया जा रहा है जबकि पहले 50 प्रतिशत वैट और एक प्रतिशत प्रवेश कर लेने का प्रावधान किया गया था। गुटखा लॉबी के दबाव में इसे लागू नहीं किया जा सका और इसे वैट 30 प्रतिशत कर दिया गया। एक प्रतिशत प्रवेश कर भी समाप्त कर दिया गया।
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में गुटखे का सालाना कारोबार 1800 से 2000 करोड़ रुपये का है जबकि जानकार बताते हैं कि सालाना कारोबार 3000 से 4000 करोड़ रुपये का है। इसका एक मोटा हिस्सा ‘ऊपर’ तक पहुंचाया जाता है। इसी वजह से गुटखे पर प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है।
1100 गुटखा मशीनें
यूपी में 1000 से 1100 के आसपास गुटखा बनाने वाली मशीनें हैं। एक मशीन से 19 लाख रुपये महीने उत्पाद शुल्क लिया जाता है। पान मसाला व्यापार मंडल के अध्यक्ष बलराम मौर्य कहते हैं कि यूपी में एक अनुमान के मुताबिक 2 अरब 90 करोड़ रुपये के आसपास उत्पाद शुल्क गुटखा मशीनों से प्रति माह जमा कराया जा रहा है।
कब कहां लगा प्रतिबंध
गोवा 2 अक्तूबर 2005, मध्य प्रदेश 1 अप्रैल 2012 , केरल 25 मई, बिहार 30 मई, हिमाचल प्रदेश 13 जुलाई, राजस्थान 18 जुलाई, महाराष्ट्र 20 जुलाई, छत्तीसगढ़ व झारखंड 24 जुलाई, हरियाणा 15 अगस्त, दिल्ली व गुजरात 11 सितंबर, पंजाब 26 अगस्त, मिजोरम इसी माह। जबकि आंध्र प्रदेश, असम, चंडीगढ़, तमिलनाडु और ओडिशा में प्रतिबंध लगाने की तैयारी है।