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मोदी के फैसले का कड़ा विरोध, विपक्ष लामबंद

Mon, 05 Jan 2015 01:32 PM IST
विनोद अग्निहोत्री/अमर उजाला, नई दिल्ली
विनोद अग्निहोत्री/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 05 Jan 2015 01:32 PM IST
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Banking Reforms - Protest over Modi's cues to privatise public sector Banks

मोदी सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी कम करके उनका प्रबंधन निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहा है।

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बैंकिंग सुधारों को लेकर यूपीए सरकार द्वारा गठित पीजे नायक कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर न सिर्फ बैंक कर्मचारियों में विरोध पनप रहा है, बल्कि कांग्रेस, जनता दल (यू) और वामदल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुट गए हैं। बैंक कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चे ने सरकार को 16 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया है।
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जनता दल (यू) के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने बैंकों के निजीकरण को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है। वाम मोर्चे के नेता अतुल अंजान का कहना है कि ऐसा करके केंद्र की भाजपा सरकार सार्वजनिक बैंकिंग प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय पूंजी के हवाले कर उसका लेहमनीकरण कर रही है।

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सरकार के फैसले के खिलाफ संघर्ष का ऐलान

Banking Reforms - Protest over Modi's cues to privatise public sector Banks

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने वेतन एवं भत्तों की विसंगतियों के मुद्दे पर सात जनवरी को प्रस्तावित हड़ताल के बाद इस मुद्दे पर भी संघर्ष का फैसला किया है। संघ के महासचिव तेजेंदर बावा का कहना है कि नायक कमेटी की रिपोर्ट पर अमल के खिलाफ भी संघर्ष होगा।

नायक कमेटी ने बैंक राष्ट्रीयकरण अधिनियम और इससे संबंधित अन्य कानूनों को खत्म करने की सिफारिश करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से सरकार की हिस्सेदारी बैंक निवेश कमेटी को स्थानांतरित करने और बैंक निवेश कमेटी को पूर्णतया व्यावसायिक विशेषज्ञों द्वारा संचालित करने की बात कही है। साथ ही निजी क्षेत्र के व्यवसायिक विशेषज्ञों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक पद पर नियुक्त करने की भी बात है।

2008 में बच गई थी अर्थव्यवस्था
वर्ष 2008 की आर्थिक मंदी अमेरिका के सबसे बड़े बैंक लेहमन ब्रदर्स के दिवालिया होने की वजह से आई थी और तब भारत की अर्थव्यवस्था के बचने की सबसे बड़ी वजह उसके सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ही थे। देश में भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए बैंकिंग प्रणाली का नियमन पुख्ता है। केसी त्यागी का कहना है कि ये निजी बैंक व्यावसायिक विशेषज्ञों द्वारा संचालित होते हैं और इनमें आम उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान नहीं रखा जाता है।

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