फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   banglure is in top of the youth suicide ratio

युवाओं की कब्रगाह में तब्दील होता बैंगलोर!

Wed, 09 Jul 2014 01:29 PM IST
शकील अख्तर/बीबीसी संवाददाता, बैंगलोर
शकील अख्तर/बीबीसी संवाददाता, बैंगलोर Updated Wed, 09 Jul 2014 01:29 PM IST
विज्ञापन
banglure is in top of the youth suicide ratio

भारत के हाईटेक शहर बैंगलौर में आत्महत्या करने वालों की संख्या और औसत देश भर में सबसे ज्यादा है।

विज्ञापन


प्रतिस्पर्धा, बाहर से आकर यहां काम कर रहे लोगों को किसी तरह का मानसिक, सामाजिक और स्पोर्ट सिस्टम नहीं मिल पाना मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक इसकी बडी वजह है।

इससे निपटने के लिए लोगों को इस बात का प्रशिक्षण दिया जा रहे है ताकि वो इस तरह के संभावित मामलों के समझ पाएं ताकि उन्हें वक्त रहते मदद दी जा सके।

बैंगलोर बन रहा है युवाओं का कब्रगाह, एक रिपोर्ट

banglure is in top of the youth suicide ratio

नवीन उन दो हजार से अधिक लोगों में शामिल है जो एक आंकडे के तौर पर बैंगलोर में हर वर्ष आत्महत्या करते हैं। पिछले महीने एक दिन में ग्यारह लोगों ने आत्महत्या की।

इस आधुनिक नगर में रोज छह से ज्यादा लोग अपनी जान लेते हैं, भारत के किसी भी बडे शहर से अधिक।

मनोचिकित्सा वैज्ञानिक डॉक्टर सीआर चंद्रशेखर कहते हैं, "बैंगलौर में कंपीटिशन बहुत है। हर कोई तेजी से पैसा कमाना चाहता है। विफलता के लिए कोई जगह नहीं है। यहां पूरे देश से लाखों लोग काम करने आते हैं।"

विज्ञापन
विज्ञापन

मुश्‍किल होता जा रहा है शहरों में जीवन

banglure is in top of the youth suicide ratio

रुखसाना हसन आत्महत्या का रुझान रखने वालों और आत्महत्या में विफल रहने वालों के लिए एक सहायता केंद्र चलाती हैं। वह कहती हैं, "तेजी से आगे बढने की होड में जीवन बहुत जटिल हो गया है। किसी में संयम नहीं है। कर्ज में डूबना, रिश्तों में दरार पडना और बीमारी आत्महत्याओं का कारण है।"

जबरदस्त प्रतिस्पर्धा, सफल होने का जूनुन मानसिक तनाव का सबसे बडा कारण है। नीमहांस हॉस्पीटल के मनोविज्ञान चिकित्सा विभाग के डॉक्टर सेंथल कुमार रेड्डी का कहना है कि बाहर से आने वालों को उस तरह का जज्बाती और मानसिक स्पोर्ट नहीं मिल पाता जिसकी तनाव के समय में जरुरत होती है।

वे कहते हैं, "यहां आत्महत्या करने वालों में अधिकतर अवसाद या मानसिक रोग के शिकार होते हैं। सही वक्त पर मदद देकर उन्हें आत्महत्या से रोका जा सकता है।"

विज्ञापन

शुरू हुई 'गेटकीपर' नाम की ट्रेनिंग

banglure is in top of the youth suicide ratio

बैंगलौर के युवाओं में आत्महत्या की बढती प्रवृति को देखते हुए नीमहांस ने आत्महत्या का इरादा रखने वालों के बारे में भांपने और उन्हें आत्महत्या से रोकने के लिए शिक्षकों, छात्रों, सरकारी संगठनों और अन्य लोगों के लिए 'गेटकीपर' नाम से ट्रेनिंग देनी शुरू की है।

डॉक्टर रेड्डी के मुताबिक थोडी सी समझ और अवसाद पीडितों को सहारा देने मात्र से हजारों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed