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डब्बे में रख बैंगलोर से चेन्नई भेजा 'धड़कता दिल'
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 04 Sep 2014 01:06 PM IST
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एक महिला का एक्सीडेंट हुआ, डॉक्टरों ने उसके दिमाग को मृत घोषित कर दिया और फिर उसके परिवार ने उसके जिस्म के अंग दान करने का फैसला किया। महिला के दिल को बैंगलोर से चेन्नई भेजा गया जहां इस दिल को एक जरूरतमंद को लगाया गया।
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बैंगलोर के बीजीएस अस्पताल से इस दिल को चेन्नई के फोर्टिस अस्तपाल भेजा गया। खास बात ये कि दिल ने करीब 342 किलोमीटर से अधिक का सफर किया और वो भी महज दो घंटे में। जिसमें करीब 45 मिनट के हवाई सफर भी शामिल है।
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इस दिल को समय पर और सुरक्षित पहुंचाने के लिए 42 किलोमीटर बैंगलोर में और 12 किलोमीटर चेन्नई में ट्रैफिक रोक दिया गया। इस पूरी कवायद को ग्रीन कॉरीडोर का नाम दिया गया।
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'द हिंदू' अखबार में छपी खबर के मुताबिक 33 साल की एक महिला के साथ एक दुर्घटना हुई जिसके बाद उसका ब्रेन डेड हो गया। परिवार की इजाजत से उसकी किडनी, लीवर, दिल और आंखें आदि निकाल ली गईं।
31 अगस्त को महिला के साथ हादसा हुआ था, एक सितंबर को वह कोमा में चली गई और दो सितंबर को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
डॉक्टरों ने उसके दिल को 'डीप फ्रीज़र बक्से' में रखा गया और चेन्नई के लिए रवाना कर दिया गया। हालांकि यह अपनी तरह का कोई पहला मामला नहीं है लेकिन फिर भी यह बेहद महत्वपूर्ण है।
ZCCK के सेक्रेटरी डी.रमेश बताते हैं कि 2009 से यह किया जा रहा है, यह तीसरा दिल है जिसे चेन्नई भेजा गया है। इसके अलावा सात लीवर भी चेन्नई और हैदराबाद भेजे जा चुके हैं।
आपको बता दें कि 17 जून को भी चेन्नई में हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए 12 किलोमीटर का रूट खाली कराया गया था और 13 मिनट में जरूरतमंद को दिल मिल गया था।
ZCCK के प्रवक्ता ने बताया कि दिल को चेन्नई इसलिए भी भेजा गया क्योंकि कर्नाटक में हृदय प्रत्यारोपण का फिलहाल कोई केस नहीं था।