बनारस में एक साथ मनी होली और दिवाली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हमारे पूर्वज जो काम नहीं कर पाए, हमने उसे पूरा किया। हमने बनारस से प्रधानमंत्री बना दिया। अब देश की प्रगति के लिए आगे क्या करना है, यह सोचना मोदी सरकार का काम है।
नीचीबाग में टेलीविजन पर नजर गड़ाए दुकानदार अश्वनी कुमार ने गौरव के साथ यह बात कही। उन्होंने अपनी दुकान के सामने 42 इंच के एलसीडी टीवी का बंदोबस्त भी किया था ताकि समवेत खुशी मना सकें।
जश्न में डूबा बनारस
सोमवार को कोई त्योहार तो नहीं था लेकिन दिन में स्वतंत्रता दिवस और शाम को दीपावली का नजारा देखने को मिला। जाम रहने वाली सड़कें शाम को खाली-खाली दिखीं क्योंकि लोग घरों में टीवी से चिपके रहे।
मंदिरों, दुकानों के चबूतरे से उठती शहनाई की मंगल धुन आतिशबाजी का स्पेशल इफेक्ट यदा-कदा घुलता रहा। राष्ट्रपति भवन में सूरज के डूबने के बाद शपथ ग्रहण होना था लेकिन उत्सवधर्मी काशी में इसका जश्न सुबह से ही शुरू हो गया।
झालरों से सजा बनारस
जीत के बाद मोदी ने जहां गंगा का अभिषेक किया था, उस दशाश्वमेध घाट पर दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक, शहनाई वादन किया गया। क्षेत्रीय नागरिक दुर्गाकुंड इलाके में मिठाई और काशी केराना व्यापार मंडल की ओर से कबीरचौरा में शरबत बांटा जाता रहा।
चौराहों पर स्वतंत्रता या गणतंत्र दिवस की तरह देशभक्ति के गीत बजते रहे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहर के सभी चौराहों व घाटों को विद्युत झालरों और झंडों से सजा दिया।
‘लो इंद्र भी खुश हुए’
यूं तो लोग राष्ट्रपति भवन जाकर वाराणसी के पहले सांसद के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण का साक्षी बनना चाहते थे, लेकिन पास नहीं मिला तो गंगा पार रेती पर संसद, नरेंद्र मोदी की प्रतिमा उकेर डाली और उसके सामने बैठकर शपथ ग्रहण भी करा दिया।
मौसम भी कभी जेठ होता रहा तो कभी सावन। दोपहर में बादल जमकर बरसे और मोदी ने जब शपथ लेना शुरू किया तो बूंदे टपकीं। मंडुवाडीह की दुकान पर टेलीविजन देख रहे लोग चीखे ‘लो इंद्र भी खुश हुए।’
मुस्लिम बहुल इलाके में भी खुशी
तमाम लोग घरों में टीवी से चिपके रहे तो माहेश्वरी भवन, चितरंजन पार्क में बड़ी स्क्रीन पर लोग लगे रहे। जगह-जगह आतिशबाजी हुई, मुस्लिम बहुल नई सड़क की गलियों से भी आतिशबाजी होती रही।
मोदी के शपथ लेते ही गोदौलिया चौराहे पर भाजपा कार्यकर्ता बैंडबाजे की धुन पर नाचने लगे और फ्रांस की गागा और उनके साथियों ने उनका साथ देना शुरू कर दिया। जश्न का सबब पूछने पर उसने कहा कि ‘आई डोंट नो, बट आई लाइक डांस’।
मुफ्त बंटी चाय
गागा से बात बीच में ही कट गई क्योंकि बांसफाटक पर आतिशबाजी शुरू हो गई और वहां मुफ्त चाय भी बंट रही थी। दस कदम आगे चबूतरे बैठे रौशन एवं उनके साथी शहनाई पर ‘रामधुन’ सजा रहे थे।
बुलानाला के राम मंदिर में सुनील प्रसन्ना तुलसीदास की रचना ‘रामचंद्र कृपालु भज मन’ की धुन बजा रहे थे। औसानगंज के बुनकर अशफाक साड़ी बेचकर लौटे तो एक दुकान पर खड़े होकर शपथ ग्रहण देखने लगे। उन्होंने कहा कि ‘सब कहि रहे हैं, कुछ न कुछ अच्छा होइए जरूर’।