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महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में भी मीट बैन, बवाल

Fri, 11 Sep 2015 11:44 AM IST
Updated Fri, 11 Sep 2015 11:44 AM IST
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ban on selling meat in rajasthan

महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में भी जैन पर्व पर्यूषण के मौके पर मीट और मछली की बिक्री पर रोक के आदेश से मामले ने सियासी रंग ले लिया है। वहीं जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की ओर से गोमांस की बिक्री पर रोक लगाने की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भाजपा पर मीट पर बिक्री पर प्रतिबंध के जरिये राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया है।

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जम्मू-कश्मीर में गो मांस की बिक्री पर प्रतिबंध का विरोध करते हुए हुर्रियत प्रमुख अली शाह गिलानी ने कहा है कि कोर्ट मुसलमानों के मामले में दखल दे रहा है।हुर्रियत ने इसके खिलाफ शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। शनिवार को घाटी में बंद रखा जाएगा।
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बृहस्पतिवार को बांबे हाईकोर्ट ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया और मुंबई महानगरपालिका को नोटिस जारी कर शुक्रवार तक जवाब दाखिल करने को कह दिया। इससे पहले शिवसेना ने जैन समाज के लोगों को धमकी देते हुए कहा कि वे मुसलमानों की तरह तुष्टिकरण की राह पर न चलें।
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उसके बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी गुजराती जैनियों को चेतावनी दी कि यह महाराष्ट्र है, गुजरात नहीं। राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में क्या खाना है, यह जैन समाज नहीं तय कर सकता। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से सवाल किया कि गणेशोत्सव और नवरात्रि में मांस बिक्री पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए?

राज ठाकरे ने साफ कहा कि दिगंबर जैन मुनियों को जब निर्वस्त्र घूमने पर कोई आपत्ति नहीं है तो मांस की बिक्री पर उन्हें एतराज क्यों हो रहा है। अब तक उत्तर भारतीयों का विरोध करने वाले राज ने पहली बार गुजरातियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गुजराती रहते यहां हैं, लेकिन उनका मन गुजरात में रहता है।

उद्धव ठाकरे का जैन समुदाय पर हमला

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इससे पहले पार्टी के मुखपत्र में लिखे संपादकीय के जरिए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अब तक कट्टरवादी मुस्लिम ही धर्म के नाम पर परेशान करते थे। अब जैन समुदाय भी इस तरह करेगा तो भगवान ही उनका भला करेगा।

पार्टी के मुखपत्र में ‘जैनियों, मुसलमानों की राह पर मत जाओ’ नामक शीर्षक के तहत लिखे संपादकीय में एक तरफ जहां शिवसेना ने जैनियों को धमकाया है, वहीं दूसरी ओर मुंबई में 1991-92 में भड़के दंगे की भी याद दिलाई है।

शिवसेना ने कहा कि उस हिंसाचार में जैन और गुजरातियों की रक्षा हिंदू-मराठियों ने ही की थी। जैन समुदाय के लोगों को बेकार की मांगे बंद कर देनी चाहिए। यही उनके हित में है।

जम्मू-कश्मीर में गोमांस की बिक्री पर हाई कोर्ट की ओर से लगाई गई रोक पर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए सैयद अली शाह गिलानी ने कहा कि यह फैसला भाजपा और संघ के कहने पर लिया गया है।

सिर्फ शरीयत कानून मानते हैं मुस्लिम

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यह फैसला बहुसंख्यक मुस्लिमों में इसकी प्रतिक्रिया की परवाह किए बिना लिया गया है। जबकि नेशनल फ्रंट के नेता नईम खान ने कहा कि मुस्लिम सिर्फ शरीयत का कानून मानते हैं। जमात-ए-इस्लामी और मुस्लिम लीग ने कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि उन्हें कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं।

जमात-ए-इस्लामी और मुस्लिम लीग ने इस्लाम विरोधी करार दिया है।  पार्टी के नवनिर्वाचित प्रमुख गुलाम मोहम्मद बट ने कहा कि हाई कोर्ट का फैसला हमें मंजूर नहीं। यह न सिर्फ देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ है बल्कि  इस्लाम के भी विरुद्ध है।

गाय का मांस मुसलमानों के लिए हलाल है और वे इसे खाना जारी रखेंगे। वहीं अलगाववादी नेता मसारत आलम की पार्टी मुस्लिम लीग न कहा है कि मुसलमान अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ समझौता नहीं करेंगे। इस्लाम में बीफ खाने की इजाजत है।

जैन कारोबारियों को खुश कर रही है भाजपा

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शिवसेना ने कहा है कि मुंबई में रियल एस्टेट कारोबार पर जैन समुदाय के लोगों का वर्चस्व है। महाराष्ट्र सरकार इस लॉबी को खुश करना चाहती है। इसलिए पर्यूषण पर्व पर मीट की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। मुंबई के ज्यादातर बिल्डर जैन हैं। उनकी डील में काली कमाई भी होती है। क्या पर्यूषण पर्व पर यह काली कमाई बंद कर देंगे।

भाजपा बैकफुट पर

मांस बिक्री पर प्रतिबंध के खिलाफ विरोध तेज होने के बाद भाजपा बैकफुट पर आ गई है। मुंबई से सटे मीरा-भाईंदर महानगरपालिका ने आठ दिन तक मांस बिक्री पर प्रतिबंध का आदेश वापस ले लिया है। अब सिर्फ दो दिन ही मांस की बिक्री बंद रहेगी। मालूम हो कि 1994 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद पर्यूषण पर्व में दो दिन तक मांस बिक्री पर पाबंदी का आदेश दिया था।

महाराष्ट्र में यह व्यवस्था 2011 तक लागू थी, लेकिन पृथ्वीराज चव्हाण के मुख्यमंत्री बनने के बाद सूबे में साल में पांच दिन की पाबंदी लागू की गई। इस साल मीरा भाईंदर महानगरपालिका ने सदन में प्रस्ताव पारित कर आठ दिन तक मांस बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया, जिससे राजनीति शुरू हो गई।

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