बाल ठाकरे का दिल का दौरा पड़ने से निधन

मुंबई/ब्यूरो Updated Sun, 18 Nov 2012 12:30 AM IST
bala saheb thackeray dies due to heart attack
मराठी अस्मिता की पहचान शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे नहीं रहे। शनिवार को मुंबई में उनका निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। ठाकरे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। पिछले कुछ दिनों से उनकी हालत बेहद नाजुक थी।

ठाकरे के निधन के बाद मुंबई में सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं। मुंबई में दुकानें, मॉल बंद कर दिए गए और सड़कों पर वाहन भी कम दिखे। रविवार को भी बाजार बंद रहने की संभावना है।

रविवार सुबह 7 बजे ‘मातोश्री’ से उनकी अंतिम यात्रा शुरू होगी जो 9 बजे शिवाजी पार्क पहुंचेगी। मुंबई के दादर स्थित शिवाजी पार्क में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। शाम 6 बजे शिवाजी पार्क स्थित श्मशान गृह में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

कार्टूनिस्ट से नेता बने ठाकरे ने बांद्रा स्थित अपने घर ‘मातोश्री’ में दोपहर बाद 3:30 बजे अंतिम सांस ली। उनका इलाज कर रहे डॉक्टर जलील पारकर ने बताया कि ठाकरे को दिल का दौरा पड़ा था और तमाम कोशिशों के बाद भी हम उन्हें बचा नहीं सके।

पौने पांच बजे करीब शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत के साथ ‘मातोश्री’ से बाहर आए डॉक्टर पारकर ने यह जानकारी दी। इसके बाद कई दिनों से ‘मातोश्री’ के बाहर डटे शिवसैनिकों में सन्नाटा सा पसर गया। कुछ बेकाबू हुए तो कुछ फूट-फूट कर रोते दिखे। इसके बाद बाला साहब अमर रहें के नारों से इलाका गूंज उठा।

ठाकरे के निधन के समय बेटे उद्धव के अलावा भतीजे राज भी परिवार के साथ वहां मौजूद थे। हिंदू हृदय सम्राट कहे जाने वाले ठाकरे की राजनीति में अलग पहचान रही। उनके एक इशारे पर देश की आर्थिक राजधानी की रफ्तार थम जाती थी। हमेशा किंगमेकर की भूमिका में रहने वाले ठाकरे ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही कभी कोई पद संभाला, जबकि 1994 में शिवसेना और भाजपा की महाराष्ट्र में सरकार भी बनी।

पीएम ने भाजपा का रात्रि भोज टाला
शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे के निधन के चलते प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आगामी संसद सत्र में आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए प्रमुख विपक्षी दल भाजपा को रात्रि भोज के न्योते को टाल दिया है। अब कंबोडिया यात्रा के लौटने के बाद प्रधानमंत्री भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे। प्रधानमंत्री ने न सिर्फ भोज टाला बल्कि ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे को फोन कर शोक भी जताया।

मुंबई में सिनेमाघर बंद
ठाकरे के निधन से बने भावनात्मक माहौल को देखते हुए सिनेमाहाल मालिकों ने शनिवार शाम से थियेटर बंद कर दिए। रविवार को भी कोई शो नहीं होगा। मल्टीप्लेक्स संचालक कंपनियों के अधिकारियों ने बताया कि किसी प्रकार की समस्या में फंसने से बचने के लिए उन्होने फिलहाल राज्य में सभी शो रद्द कर दिए हैं। सोमवार से थियेटर खोलने के बारे में रविवार को पुलिस से विचार-विमर्श कर फैसला लिया जाएगा। उन्होने बताया कि एडवांस बुकिंग कैंसिल कर पैसे वापस कर रहे हैं।

कैरियर
1950 के दशक के अंत में फ्री प्रेस जरनल में कार्टूनिस्ट के तौर पर कैरियर शुरू किया।

मार्मिक
1960 में उन्होंने अपनी कार्टून साप्ताहिक पत्रिका ‘मार्मिक’ शुरू की, जिसके जरिए उन्होंने मराठी मानुष को उनके हक दिलाने का मुद्दा उठाया।

शिवसेना
ठाकरे ने 19 जून, 1966 को शिवसेना पार्टी बनाई। इसके जरिए वे महाराष्ट्र के लोगों के लिए नौकरियों की सुरक्षा की अपनी लड़ाई को और आगे ले गए।

सामना
शिवसेना ने अपने विचार जनता के बीच रखने के लिए 1989 में मुखपत्र ‘सामना’ लांच किया। इसमें रोजाना बाल ठाकरे का संपादकीय रहता था।

सत्ता
राजनीति में ठाकरे के लिए सबसे बड़ा क्षण 1994 में आया, जब भाजपा के साथ मिलकर शिवसेना ने महाराष्ट्र में सरकार बनाई। ठाकरे मुख्यमंत्री तो नहीं बने, लेकिन सरकार का ‘रिमोट कंट्रोल’ उनके हाथ में ही रहा।

खुलकर बोले ठाकरे
हिटलर ने बहुत ही क्रूर और बुरी चीजें कीं। लेकिन वह एक कलाकार था। मैं उसे पसंद करता हूं। उसमें एक करिश्मा था। वह निर्भीक और साहसी था। उसमें अच्छाइयां और बुराइयां दोनों थीं। मुझमें अच्छी और बुरी बातें हो सकती हैं।

मैं भले ही काला चश्मा पहनता हूं, लेकिन मैं महाभारत का धृतराष्ट्र नहीं हूं। मुझे सपने में भी राज से ऐसी उम्मीद नहीं थी। मुझे उसके जाने से पीड़ा हुई है।

सबसे बड़ा झटका
ठाकरे को जीवन का सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब 2005 में उनके भतीजे राज ठाकरे ने शिवसेना छोड़ दी। 2006 में राज ने अपनी पार्टी मनसे का गठन किया।

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