बयानों को लेकर विवादों में भी रहे बाल ठाकरे
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बाल ठाकरे अपने उत्तेजित करने वाले बयानों के लिये जाने जाते रहे हैं और इसके कारण उनके खिलाफ सैकड़ों की संख्या में मुकदमे दर्ज किये गये। ठाकरे ने बाहर से आकर मुंबई बसने वाले लोगों पर कटाक्ष करते हुए महाराष्ट्र को सिर्फ मराठियों का कहकर संबोधित किया। दक्षिण भारतीय लोगों के विरोध में उन्होंने कई भद्दे नारे भी दिए। साथ ही, वैलेंटाइन डे को हिंदू धर्म और संस्कृति के लिए खतरा बताकर दुकानों और होटलों में तोड़-फोड़ करने के अलावा प्रेमी युगलों पर हमला, अभद्र भाषा का प्रयोग करने के लिए भी वे विवादों में रहे। लिट्टे का समर्थन और उसकी प्रशंसा करने पर भी बाल ठाकरे को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
ये हैं कुछ विवादित बयान
महाराष्ट्र को एक हिंदू राज्य बताते हुए और मुसलमानों के खिलाफ टिप्पणी करते हुए मुंबई आने वाले मुसलमानों (विशेषकर बांग्लादेश से आने वाले) को वहां से चले जाने को कहा।
1980 के दशक में मुसलमानों की तुलना कैंसर (बीमारी) से करते हुए कहा कि वे कैंसर की तरह फैल रहे हैं। देश को उनसे बचाया जाना चाहिए।
पार्टी के मुखपत्र माने जाने वाले सामना समाचार पत्र में बिहार और उत्तर प्रदेश से मुंबई पलायन करने वाले लोगों को मराठियों के लिए खतरा बताते हुए महाराष्ट्र के लोगों को उनके साथ सहयोग ना करने की सलाह दी।
2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के आरोपी मोहम्मद अफजल की फांसी की सजा पर कोई फैसला ना सुनाने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर भी अभद्र टिप्पणियां की।
2007 में एक समाचार पत्र को दिए अपने साक्षात्कार के दौरान हिटलर की प्रशंसा करने पर भी बाल ठाकरे को जनता की आलोचना का सामना करना पड़ा।
2011 में हुए क्रिकेट वर्ल्ड कप फाइनल के लिए भारत-पाकिस्तान के बीच हुए क्वालिफाइंग मैच पर शिवसेना ने यह टिप्पणी की कि यदि पाकिस्तान यह मैच जीत गया तो शिवसेना निर्णय करेगी कि वह फाइनल में खेलेगा या नहीं।
1993 में बाल ठाकरे ने कहा था कि अगर मुझे गिरफ्तार किया गया तो पूरा देश उठ खड़ा होगा। अगर मेरी वजह से एक पवित्र युद्ध होता है तो फिर इसे होने दें।
25 जुलाई 2000 को बाल ठाकरे को 1993 दंगों के दौरान मुसलमानों पर हमले करने के लिए उकसाते हुए सामना में लेख लिखने के लिए गिरफ्तार किया गया। उन्होंने खुद को पुलिस के हवाले किया और उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। मजिस्ट्रेट ने मामले को दर्ज किया फिर बाल ठाकरे छूट गए।
2007 में बाल ठाकरे को शिव सेना की एक रैली में भड़काऊ भाषण देने के लिए गिरफ्तार किए गए लेकिन तुरंत ही उन्हें जमानत मिल गई।
नवंबर 2009 में बाल ठाकरे के गुस्से का शिकार बने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर। उन्होंने तेंदुलकर की आलोचला की और सचिन से क्रिकेट के मैदान तक ही सीमित रहने को कहा। सचिन ने कहा था कि मुंबई पर सभी भारतवासियों का हक है।