मराठा मानुष की राजन‌ीति का चेहरा थे बाल ठाकरे

नई दिल्‍ली/इंटरनेट डेस्‍क Updated Sat, 17 Nov 2012 05:17 PM IST
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बाल ठाकरे 'मराठा मानुष' की राजन‌ीति का चेहरा थे। उनके प्रशंसकों ने उन्हें 'हिंदू हृदय सम्राट' कहा। महाराष्ट्र की राजनीति में उन्होंने किंगमेकर की भूमिका भी निभाई। भारतीय राजनीति में उनका उभार ठीक उसी समय हुआ जब केंद्र में बैठी कांग्रेस, वाम और जनसंघ जैसी पार्टियों की चूलें दरकने लगीं। क्षत्रपों का उदय और स्‍थानीय दलों का वर्चस्व दरअसल बाल ठाकरे जैसे नेताओं की ही देन था।

बाल ठाकरे ने करियर की शुरुआत एक कार्टूनिस्‍ट के रूप में की। वह एक पॉलीटिकल कार्टूनिस्ट थे और मुंबई में फ्री प्रेस जर्नल में काम करते थे। बाद में उन्होंने अपना खुद का राजनी‌तिक साप्ताहिक 'मार्मिक' शुरू किया।

ठाकरे के पिता केशव सीताराम ठाकरे संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के अग्रणी नेताओं में एक थे। इस आंदोलन ने भाषाई आधार पर संयुक्त महाराष्ट्र के गठन की मांग की थी। बाल ठाकरे पर उनके पिता के विचारों को गहरा असर था।

1966 में महाराष्ट्र की राजनीति में मराठों को वर्चस्व दिलाने के उन्होंने शिवसेना का गठन किया। शिवसेना ने मराठियों को महाराष्ट्र में रोजगार दिलाने के लिए राजनीतिक अभियान भी चलाया।

हालांकि मुंबई में रहे रहे द‌‌क्षिण भारतियों, गुजरातियों और मारवाड़ियों के खिलाफ होने के कारण इस आंदोलन की बदनामी अधिक हुई। मराठी अस्मिता के प्रचार के लिए ही 1989 उन्होंने मराठी अखबार 'सामना' की शुरूआत की।
 
60 व 70 के दशक में शिवसेना ने मुंबई के ट्रेड यूनियनों पर कब्जा जमाने के लिए वामपंथी मजदूर संगठनों के खिलाफ अभियान भी चलाया। 90 के दशक उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ हिंदुत्व के मुद्दे पर सहमति होने के काण राजनीतिक गठबंधन किया।

1995 में यह गठबंधन महाराष्ट्र में सत्‍ता में आया। उस दौर में ठाकरे का 'रिमोट कंट्रोल' भी कहा गया। कहा जाता था कि उस समय सरकार से जुड़े सभी फैसलों में बाल ठाकरे का सीधा हस्तक्षेप होता था।

28 जुलाई, 1999 को चुनाव आयोग ने बाल ठाकरे को छह सालों के लिए वोट देने और चुनाव लड़ने से बैन भी कर दिया था। छह सालों बाद 2005 में मुंबई नगर निगम के चुनाव में उन्होंने पहली बार वोट ‌किया था।

बाल ठाकरे दावा करते थे उनकी पार्टी ने मराठा मानुष के हितों के लिए संघर्ष किया। उनका कहना था कि उन्होंने हिंदुओं के अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। हालांकि बाल ठाकरे के विरोधी कहते हैं कि शिवसेना ने अपने सत्‍ता में रहते हुए मराठी युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए एक भी निर्णय नहीं लिया।

बाल ठाकरे का विवादों से भी गहरा नाता रहा। अल्पसख्‍ंयकों के प्रति अपने विचारों के चलते तो विरोधियों के निशाने पर रहे है। उत्‍तर प्रदेश और बिहार के लोगों के साथ महाराष्ट्र में मारपीट के कारण भी व‌ह विवादों में रहे।

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