बीकानेर की बदनी देवी ने लिया संथारा
जैन समाज की प्रथा संथारा पर से सुप्रीम कोर्ट के रोक हटाने के बाद राजस्थान के बीकानेर में 82 वर्षीय बदनी देवी डागा ने इस प्रथा के तहत शनिवार को अपने प्राण त्यागे।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अगस्त में संथारा को आत्महत्या की श्रेणी का मानते हुए इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पूर्व ही इस पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद संथारा लेने का यह पहला मामला है।
मालूम हो कि संथारा लेने वाला व्यक्ति खाना छोड़ देता है। बदनी देवी के पुत्र सुरेंद्र डागा ने बताया कि जैन धर्म के अनुसार उनकी मां ने आचार्य महाश्रमण से अनुमति लेने के बाद संथारा शुरू किया था।
बदनी देवी ने शुरुआती आठ दिन तपस्या के बाद संथारा के जरिये देह त्यागने का फैसला लिया और 25 जुलाई से संथारा शुरू किया। उन्होंने बीकानेर स्थित गंगाशहर में अपने निवास पर 51वें दिन देह त्याग दी।
जैन समाज ने किया था फैसले का विरोध
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने से पहले ही बदनी देवी ने संथारा ले लिया था, लेकिन हाईकोर्ट की रोक लगाने की वजह से उन्होंने और उनके परिजनों ने सूचना सार्वजनिक नहीं की थी।
उच्चतम न्यायालय की ओर से सोमवार को जैसे ही उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगी, बदनी देवी के परिजनों ने 46वें दिन उनके संथारा लेने की घोषणा कर दी थी।
संथारा को लेकर हाईकोर्ट के 10 अगस्त के फैसले के बाद जैन समाज ने अदालत के फैसले को धार्मिक भावनाओं पर चोट करार दिया था और आंदोलन करने की घोषणा की थी। इसके तहत देश भर में मौन जुलूस निकाला गया।