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बीकानेर की बदनी देवी ने लिया संथारा

Sat, 05 Sep 2015 07:50 PM IST
Updated Sat, 05 Sep 2015 07:50 PM IST
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Badni Devi takes santhara in Bikaner

जैन समाज की प्रथा संथारा पर से सुप्रीम कोर्ट के रोक हटाने के बाद राजस्थान के बीकानेर में 82 वर्षीय बदनी देवी डागा ने इस प्रथा के तहत शनिवार को अपने प्राण त्यागे।

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राजस्थान हाईकोर्ट ने अगस्त में संथारा को आत्महत्या की श्रेणी का मानते हुए इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पूर्व ही इस पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद संथारा लेने का यह पहला मामला है।
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मालूम हो कि संथारा लेने वाला व्यक्ति खाना छोड़ देता है। बदनी देवी के पुत्र सुरेंद्र डागा ने बताया कि जैन धर्म के अनुसार उनकी मां ने आचार्य महाश्रमण से अनुमति लेने के बाद संथारा शुरू किया था।
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बदनी देवी ने शुरुआती आठ दिन तपस्या के बाद संथारा के जरिये देह त्यागने का फैसला लिया और 25 जुलाई से संथारा शुरू किया। उन्होंने बीकानेर स्थित गंगाशहर में अपने निवास पर 51वें दिन देह त्याग दी।

जैन समाज ने किया था फैसले का विरोध

Badni Devi takes santhara in Bikaner

सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने से पहले ही बदनी देवी ने संथारा ले लिया था, लेकिन हाईकोर्ट की रोक लगाने की वजह से उन्होंने और उनके परिजनों ने सूचना सार्वजनिक नहीं की थी।

उच्चतम न्यायालय की ओर से सोमवार को जैसे ही उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगी, बदनी देवी के परिजनों ने 46वें दिन उनके संथारा लेने की घोषणा कर दी थी।

संथारा को लेकर हाईकोर्ट के 10 अगस्त के फैसले के बाद जैन समाज ने अदालत के फैसले को धार्मिक भावनाओं पर चोट करार दिया था और आंदोलन करने की घोषणा की थी। इसके तहत देश भर में मौन जुलूस निकाला गया।

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