बदायूं कांड: CBI जांच में आया नया मोड़
बहुचर्चित कटरा सआदतगंज कांड की जांच कर रही सीबीआई के पास जो तथ्य हैं वे बता रहे हैं कि इस मामले में दर्ज रिपोर्ट ही गलत थी। जांच एजेंसी अब मामले की एफआईआर को ही फर्जी करार देने की तैयारी में है इसीलिए इस मामले चार्जशीट दाखिल नहीं की जा रही है।
सीबीआई का मानना है कि उसहैत थाना पुलिस ने जल्दबाजी में प्रारंभिक जांच किए बगैर मुख्य गवाह बाबूराम उर्फ नजरू के बयान पर रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। लड़कियों के परिवार वाले और दूसरा गवाह रामबाबू भी इस बात को मान रहा है।
सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों सीबीआई ने मुख्य गवाह बाबूराम और मुख्य आरोपी पप्पू यादव का आमना-सामना कराया था। उसमें बाबूराम पप्पू यादव के कई सवालों पर चकरा गया था।
सीबीआई जांच में सामने आए नए तथ्य
उसहैत थाने के गांव कटरा सआदतगंज में 27/28 मई की रात दो चचेरी बहनों से कथित रेप के बाद उनकी हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिए गए थे। मामले में छोटी लड़की के पिता की ओर से पप्पू यादव, अवधेश यादव, उरवेश यादव (सगे भाई) समेत सिपाही सर्वेश यादव और छत्रपाल गंगवार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
एफआईआर में कहा गया था कि मुख्य गवाह बाबूराम उर्फ नजरू और दूसरे गवाह रामबाबू के सामने तीनों भाई तमंचे के बल पर लड़कियों को जंगल की ओर ले गए थे। बाद में दोनों लड़कियों के साथ रेप हुआ और उनकी हत्या कर शव पेड़ पर लटका दिए गए।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि घटना वाली रात दूसरा गवाह रामबाबू घर पर था, जबकि एफआईआर में इसे बाबूराम के साथ होना दिखाया गया है। मेडिकल बोर्ड पहले ही लड़कियों के साथ रेप होने की बात से इंकार कर चुका है। पॉलीग्राफी टेस्ट में गवाहों और पीड़ित परिवार के बयानों में विरोधाभास था, जबकि मुख्य गवाह बाबूराम उर्फ नजरू टेस्ट में फेल हो गया था। मुख्य आरोपी घटना वाली रात बाबूराम से झड़प होने की बात स्वीकार कर रहा है लेकिन लड़कियों को ले जाने से वह इन्कार कर रहा है। पॉलीग्राफी टेस्ट में भी पप्पू के बयानों को सच करार दिया गया है।