बदायूं कांड: CBI जांच के घेरे में विधायक
बदायूं दुष्कर्म और हत्या कांड की जांच में सीबीआई को उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच से बिल्कुल उलट तथ्य मिल रहे हैं। सीबीआई अब हत्याकांड की पुरानी थ्योरी से अलग हटकर राज्य की एक बड़ी विरोधी राजनीतिक पार्टी के विधायक की भूमिका की जांच कर रही है।
इस स्थानीय नेता ने मामले को सियासी रंग देने के लिए दोनों बहनों की पेड़ से टंगी लाश को मीडिया के आने तक उतारने नहीं दिया था। एजेंसी को मामले से जुड़े ऐसे सटीक सुराग मिल रहे हैं कि अब उसे दोनों बहनों की गड़ी लाश को निकाल कर उसके दोबारा पोस्टमार्टम की जरूरत नहीं है।
सीबीआई कर रही रिपोर्ट का अध्ययन
सीबीआई की अब तक की जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि दोनों बहनों के साथ दुष्कर्म हुआ ही नहीं था। हालांकि एजेंसी अभी किसी अंतिम नतीजे तक पहुंचने से पहले कई और तकनीकी रिपोर्ट का गहन विश्लेषण कर रही है।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक गवाहों और दोनों बहनों के घर वालों के पॉलीग्राफी टेस्ट की तरह दोनों बहनों की डीएनए रिपोर्ट में भी कई विसंगतियां हैं। अंतिम नतीजे के लिए सीबीआई ने डीएनए रिपोर्ट मेडिकल बोर्ड को भेज दी है।
सीबीआई जल्द सुलझा लेगी मामला
इन सवालों पर सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा ने कहा कि अब पूरा मामला फॉरेंसिक जांच पर निर्भर कर रहा है। एजेंसी जल्द ही मामले को सुलझा लेगी। सिन्हा के मुताबिक इन लड़कियों के साथ दुष्कर्म नहीं होने की बात राज्य के पुलिस महानिदेशक ने भी कही थी। वह एक तजुर्बेकार पुलिस अधिकारी हैं।
अब उनकी बात सही होती दिख रही है। सीबीआई के मुताबिक अंतिम निष्कर्ष यूपी पुलिस की थ्योरी से उलट निकलने की पूरी संभावना दिख रही है। ऐसे में गिरफ्तार पांच आरोपियों को जेल से निकाल कर सही आरोपियों तक पहुंचना सीबीआई की जिम्मेदारी है। इन हालात में गलत जांच करने वाले राज्य पुलिस अधिकारियों को भी आरोपी बनाया जाएगा।
कई बातें पुलिस रिकॉर्ड में नहीं
जांच से जुड़े रहे सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि घटना वाली रात इलाके में कई ऐसी बातें हुईं जिन्हें पुलिस ने रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं किया। मामले के पांच आरोपियों को लड़कियों के पिता और दो गवाहों के कहने पर गिरफ्तार किया गया।
यह आरोपी एक ही जाति से संबंध रखते हैं। लेकिन जांच में कई बातें गलत निकल रही हैं। सूत्रों के मुताबिक उस रात जो कुछ भी हुआ उसके तथ्यों को बदल कर राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई है।
सीबीआई नहीं कराएगी शवों का दोबारा पोस्टमार्टम
बदायूं के कटरा सआदतगंज कांड की जांच कर रही सीबीआई अब लड़कियों के शवों का दोबारा पोस्टमार्टम नहीं कराएगी। जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें तो अब तक उसको इतने तथ्य मिल चुके हैं कि दोबारा पोस्टमार्टम कराना जरूरी नहीं है। हालांकि दोबारा पोस्टमार्टम का इरादा छोड़ने के पीछे गंगा का जल स्तर और शवों को निकालने में लगातार हो रही देरी को भी माना जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो बुधवार को दिल्ली में होने वाली मेडिकल बोर्ड की बैठक में इस पर आखिरी मोहर भी लग जाएगी।
सीबीआई दोनों लड़कियों के शवों का दोबारा पोस्टमार्टम कराना चाहती थी। इसके लिए जांच एजेंसी ने 19 जुलाई को अटैना घाट पर दफन दोनों शवों को निकालने की कोशिश भी की लेकिन गंगा का जल स्तर बढ़ने से सीबीआई को इसमें कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद से सीबीआई का मेडिकल बोर्ड दोबारा पोस्टमार्टम पर मंथन कर रहा है।
हाईकोर्ट में दाखिल हुई स्टेटस रिपोर्ट
सीबीआई की एक टीम ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में कटरा सआदतगंज कांड की जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी। सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसी ने अब तक जांच में हुई प्रगति के बारे में कोर्ट में बताया है। सीबीआई की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल की गई यह तीसरे स्टेटस रिपोर्ट है। सूत्रों ने बताया कि अगली स्टेटस रिपोर्ट अब सितंबर के पहले सप्ताह में दी जानी है।