इलाहाबाद: सिविल सेवा में आईएएस फैक्ट्री का सफाया
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संघ लोक सेवा आयोग की ओर से बृहस्पतिवार को घोषित सिविल सेवा के परिणाम में आईएएस फैक्ट्री कहे जाने वाले इलाहाबाद को करारा झटका लगा है। कभी आईएएस-आईपीएस में देश भर में सबसे अधिक सेलेक्शन देने वाले इलाहाबाद को निराशा मिली है।
सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के पैटर्न में 2011 में लागू बदलाव का असर यह रहा कि हिंदी पट्टी से इस बार भी गिनती के परीक्षार्थी सफल हुए थे।
आयोग की ओर से प्रारंभिक परीक्षा के पैटर्न में बदलाव कर सीसैट लागू करने के बाद हिंदी पट्टी के विश्वविद्यालयों में पढ़ाए जाने वाले विषयों इतिहास, राजनीति शास्त्र, दर्शनशास्त्र आदि का असर खत्म हो गया।
बदले हुए पैटर्न से नहीं जुड़ पा रहे छात्र
प्रारंभिक परीक्षा से विषय हटने और उसमें रीजनिंग, अंग्रेजी, प्रशासनिक अभिरुचि सहित अन्य विषयों का समावेश किए जाने के बाद इलाहाबाद सहित अन्य विवि के छात्र पहले ही दौर में लड़ाई से बाहर हो गए।
सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में छात्रों का मार्गदर्शन करने वाले रनीश जैन का कहना है कि सिविल सेवा 2013 की प्रारंभिक परीक्षा में ही लड़ाई से बाहर हो जाने के बाद इलाहाबाद के प्रतियोगी इस परीक्षा को लेकर बहुत आशान्वित नहीं थे।
मुख्य परीक्षा में भी एक फिल्टर और होने के बाद गिनती के छात्रों ने इलाहाबाद से साक्षात्कार में हिस्सा लिया था। अब अंतिम परिणाम में इलाहाबाद विवि से पढ़ाई करने वाले छात्र बाहर हो गए। ऐसा नहीं कि अब इविवि में पढ़ाई का स्तर खराब हो गया है अथवा यहां अच्छे छात्र नहीं आ रहे। बल्कि पैटर्न में हुए बदलाव से यहां के छात्र अपने आप को जोड़ नहीं पा रहे हैं।