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नहीं सुधर रही यूपी पुलिस, दो शर्मनाक कारनामे

Fri, 13 Feb 2015 03:40 PM IST
विनोद कुमार तिवारी, ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़, वाराणसी
विनोद कुमार तिवारी, ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़, वाराणसी Updated Fri, 13 Feb 2015 03:40 PM IST
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UP police haunting innocent Police

अलीगढ़ में विकास भवन कर्मचारी की डेढ़ साल की नातिन पांच दिन से लापता है। उसका कहीं सुराग नहीं लगा है। पुलिस खुद तलाश करने की जगह पीड़ितों से पंफलेट बंटवाकर तलाश करवाने की नसीहत दे रही है। आठ फरवरी को घर के बाहर से गायब हुई बच्ची के अपहरण का मुकदमा भी अभी तक दर्ज नहीं किया गया है। इस मामले में कर्मचारियों में आक्रोश। उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दे दी।

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विकास भवन में तैनात सत्यप्रकाश का गांधीपार्क थानाक्षेत्र की अंबेडकर कॉलोनी में घर है। 8 फरवरी को घर के बाहर से सुबह साढ़े नौ बजे गायब हुई नातिन जाह्नवी की तलाश में वह पंफलेट चिपकाता फिर रहा है। उसने बताया कि गांधी पार्क पुलिस ने उससे कहा कि पंफलेट छपवाकर कुछ ईनाम भी रख दो। तुम खुद भी तलाश करो। इस मामले में पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को भी दरकिनार कर दिया। सूचना देने के बाद सोमवार को पुलिस मामले की जानकारी करने पहुंची थी, इसके बाद कोई खबर नहीं ली।
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सुप्रीम कोर्ट तक तल्ख, पुलिस फिर नहीं सुधरी
गांधी पार्क पुलिस ने चार दिन बाद भी जाह्नवी के मामले की एफआईआर नहीं लिखी है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्तूबर 14 को लापता बच्चों की तलाशी में लापरवाही के मामले में कहा था कि जब मामला बड़े लोगों से जुड़ा होता तो पूरा महकमा लग जाता है। अगर बच्चा किसी गरीब का हो तो मामला तक दर्ज नहीं होता। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार की रपट पर भी तल्ख टिप्पणी की थी। निर्देश दिया था कि जैसे ही बच्चे की गुमशुदगी के बारे में शिकायत की जाए पुलिस को तुरंत एफ आईआर करनी चाहिए।
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प्रभारी सीडीओ शैलेंद्र सिंह ने कहा कि मामला गंभीर है। मैं एसपी सिटी से कार्रवाई करने को कहता हूं। बच्ची जल्द और सुरक्षित मिलनी चाहिए।

अध्यक्ष उप्र राज्य कर्मचारी-अधिकारी महासंघ इंजी. राकेश शर्मा का कहना है कि यह घटना दिल दहलाने वाली है। इस संबंध में शुक्रवार को विकास भवन में 11 बजे महासंघ की बैठक में आगे का निर्णय लिया जाएगा। महासंघ एसएसपी-डीआईजी से त्वरित कार्रवाई के लिए कहेगा। बच्ची बरामदगी को प्रभावी कार्रवाई न होने पर आंदोलन को बाध्य होंगे।

निर्दोष को सता रही यूपी पुलिस

UP police haunting innocent Police

वाराणसी में तीन साल पहले जिस लड़के को गहन जांच-पड़ताल के बाद निर्दोष मानकर छोड़ दिया गया, उसे और उसके परिवार को अब भी पूछताछ के नाम पर रह-रहकर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। लोकल पुलिस और खुफिया एजेंसियों के अफसरों की पूछताछ के चलते न सिर्फ एमएससी आईटी की पढ़ाई कर रहा वह छात्र अवसाद में है बल्कि उसके माता-पिता का भी बुरा हाल है। उनके मोबाइल पर रिंग बजते ही उन्हें घबराहट होने लगती है कि कहीं फिर तो किसी अफसर का फोन नहीं आया। पिता की मानें तो वो आए दिन की इस पूछताछ से बेहद आजिज आ चुके हैं और शीघ्र ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाएंगे।

नई सड़क स्थित काजीपुरा कला निवासी श्रवण कुमार एक सरकारी विभाग में वरिष्ठ लिपिक हैं। उन्होंने अपनी पुत्री की शादी आशापुर के एक परिवार में वर्ष 2012 में तय की थी। सगाई के बाद उन्हें पता चला कि जिस लड़के से रिश्ता हो रहा है उसका चाल-चलन ठीक नहीं है। ऐसे में उन्होंने रिश्ता तोड़ दिया। अब क्या, उस लड़के ने उनके परिवार को बर्बाद करने की धमकी देनी शुरू कर दी। बकौल श्रवण, उस लड़के ने उनके पुत्र शांतनु के नाम फर्जी मेल आईडी बनाकर 23 मार्च 2012 को दिल्ली पुलिस को एक ईमेल भेजकर पीएम और सीएम को उड़ाने की धमकी दे डाली। यही नहीं, शांतनु को फंसाने के लिए उसने मेल करने वाले की जगह उसका पूरा नाम और पता भी लिख दिया। अब क्या पुलिस और खुफिया एजेंसियां शांतनु के परिवार के पीछे पड़ गईं। तब से अब तक लगभग तीन साल होने को हैं, मगर क्लीन चिट मिलने के बाद भी रह-रहकर अफसर पूछताछ करने पहुंच जाते हैं।

जिस दिन मेल भेजा गया था उसके दूसरे दिन लोकल पुलिस और खुफिया एजेंसी के अफसर शांतनु के घर पहुंच गए। उन्होंने साइबर एक्सपर्ट को बुलाकर उसका कंप्यूटर चेक किया पर उन्हें कुछ नहीं मिला। अगले दिन लक्सा पुलिस शांतनु को थाने उठा ले गई। वहां उससे देश की कई खुफिया एजेंसियों ने पूछताछ की। देर रात शांतनु को इस शर्त के साथ छोड़ा गया कि वह रोज आकर थाने में हाजिरी लगाएगा। कुछ दिन तक उसके परिवार ने यह भी किया। बाद में उसे यह कहकर मना कर दिया गया कि मामला क्लीयर हो गया है अब तुम्हें आने की जरूरत नहीं, मगर इसके बाद भी उसका पीछा नहीं छूटा। कुछ दिनों बाद सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी पूछताछ करने पहुंच गए। आज स्थिति यह है कि देश में कही भी कोई घटना हो, पूछताछ करने अफसर उसके घर पहुंच जाते हैं।

बकौल श्रवण कुमार, पिछले माह दो बार जांच के नाम पर उनसे पूछताछ की जा चुकी है। एक बार तो अफसर उससे पूछताछ करने वहां भी चले गए, जहां वह जॉब करता है। उनका कहना है कि जब मेरा पुत्र निर्दोष साबित हो चुका है तब ये पूछताछ क्यों। जिसने मेल भेजा उसे पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। उसे जमानत भी मिल गई, मगर पूछताछ के नाम पर मेरे परिवार का उत्पीड़न हो रहा है। इसके चलते हम लोग बेहद दुखी हैं। आजिज आकर मैं अब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखने जा रहा हूं ताकि मुझे न्याय मिले। पुलिस के इस पचड़े के चलते मेरे पुत्र की पढ़ाई बीच में ही छूट गई। वह हमेशा मानसिक रूप से उलझन में रहता है। डर लगा रहता है कि किसी दिन वह कोई गलत कदम न उठा ले।

एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने कहा है कि जांच में अगर लड़का निर्दोष साबित हो चुका हैं तो उसे तंग नहीं किया जाएगा। पूछताछ करने कौन लोग घर जा रहे हैं, इसकी जानकारी मुझे दें, जांच कराके ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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