कुशवाहा मामले की सुनवाई से जज ने खुद को किया अलग
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राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम)घोटाले में आरोपी उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा की जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी।
अवकाशकालीन पीठ के जज से इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अब इस मामले की सुनवाई आठ जुलाई को दूसरी पीठ के समक्ष होगी। कुशवाहा तीन वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं।
सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ की अध्यक्षता करने वाले न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल ने सोमवार को खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। हालांकि उन्होंने इसका कोई कारण नहीं बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने की थी जमानत याचिका खारिज
इससे पहले न्यायमूर्ति एके सिकरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में सीबीआई ने नोटिस जारी किया था। कुशवाहा ने अपनी याचिका में कहा है कि वह तीन मार्च 2012 से जेल में बंद हैं और इस मामले में आरोप भी निर्धारित हो चुके हैं।
गत 13 फरवरी को शीर्ष अदालत ने कुशवाहा की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि उन पर लगे आरोप बहुत गंभीर है। हालांकि पीठ ने कहा था कि अगर उन्हें लगता हो कि ट्रायल में देरी हो रही है तो वह छह महीने बाद फिर से जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं। मालूम हो कि कुशवाहा को भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (1)(डी) के तहत आरोपित किया गया है।