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बाबरी विध्वंस: आडवाणी, जोशी के खिलाफ दस्तावेज दाखिल

Fri, 01 Feb 2013 08:33 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 01 Feb 2013 08:33 PM IST
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babri demolition advani joshi against document filing

सीबीआई ने दिग्गज भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित अन्य नेताओं के खिलाफ बाबरी ढांचे को ढहाए जाने की साजिश रचने संबंधी आरोप बहाल करने के मामले में सर्वोच्च अदालत में दस्तावेज दाखिल किए हैं। एजेंसी ने एफआईआर, आरोपपत्र, निचली अदालत में हुई कार्यवाही और उसके आदेश सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए हैं।

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सीबीआई की ओर से दाखिल आवेदन में इन दस्तावेजों को अदालत से रिकॉर्ड में लेने की मांग की गई है। बाबरी विध्वंस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थीं। पहला मामला आडवाणी सहित अन्य नेताओं के खिलाफ था जो दिसंबर, 1992 में बाबरी ढांचे को ढहाए जाने के दौरान अयोध्या के राम कथा कुंज के मंच पर मौजूद थे। जबकि दूसरा मामला अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ है जो विवादित ढांचे के अंदर और बाहर मौजूद थे।
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विशेष अदालत के 2001 में दिए गए फैसले को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा था कि निचली अदालत के निष्कर्षों में कोई भी खामी नहीं पाई गई। सीबीआई ने आडवाणी और 20 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड की धारा 153ए, 153बी और 505 के तहत आरोपपत्र दायर किया था। उसी पर न्यायाधीश ने कहा था कि सीबीआई ने रायबरेली में सुनवाई के दौरान या याचिका में कभी भी इस बात का जिक्र नहीं किया कि इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का आरोप है जैसा कि अब कहा जा रहा है।
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सर्वोच्च अदालत ने एजेंसी की ओर से दायर मामले पर आडवाणी सहित 21 लोगों को 4 मार्च, 2011 को नोटिस जारी किया था। इनमें से अब शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे का निधन हो चुका है। हालांकि इस मामले में उनकी ओर से कोई जवाब भी नहीं दाखिल किया गया। जबकि आडवाणी, जोशी, विनय कटियार और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई की याचिका खारिज करने की गुजारिश की है। इन राजनेताओं एजेंसी की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए निचली अदालत के फैसले को सही बताया है।


गौरतलब है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने मई, 2010 के फैसले में कहा था कि विशेष अदालत के 4 मई, 2001 के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की पुनर्विचार याचिका का कोई आधार नहीं है। इस फैसले में इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप खत्म करने का आदेश दिया गया था। एजेंसी ने सर्वोच्च अदालत में हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है।

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