मोदी ने मानी रामदेव की बात तो नहीं रहेगा CBSE
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देश में चल रही वर्तमान शिक्षा व्यवस्था से बाबा रामदेव खुश नहीं दिख रहे हैं। शायद इसीलिए उन्होंने इसमें बड़े बदलाव की योजना बनाई है। इस मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात की है।
बाबा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए उनके सामने एक प्रस्ताव रखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को देश में एक नया बोर्ड गठन की मांग की है। उन्होंने सीबीएसई की तर्ज पर ही अब एनएसबी यानी नेशनल स्कूल बोर्ड बनाने की बात कही है। बाबा रामदेव ने इस बोर्ड के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय संस्कृति और इससे जुड़े तथ्यों को शामिल करने की मांग की है।
इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में बाबा रामदेव ने अपनी बात रखी है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस बोर्ड के जरिए ऐसे स्कूल को मान्यता देने की बात कही जिसमें प्राचीन गुरुकुल सिस्टम को फिर से शुरू किया जा सके। उन्होंने इस बोर्ड का नाम दिया है बीबीएसई यानी भारतीय बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन।
बाबा रामदेव ने रखा प्रस्ताव
बाबा रामदेव ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से उनके शपथ ग्रहण के करीब डेढ़ महीने बाद ही इस मुद्दे पर बात की थी। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी से बातचीत में लगा कि वो भी इस सिस्टम में बदलाव चाहते हैं। खास तौर से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करते हुए इसे आधुनिकता के साथ भारतीयता और पवित्रता को शामिल करने पर सहमती जताई थी। उन्होंने इस मुद्दे पर आगे बढ़ने की भी बात कही थी।
रामदेव ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाने की बात कही है। उन्होंने बताया कि अब वो इस मुद्दे को मानव संसाधन मंत्रालय तक लेकर जाएंगे। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर जल्द ही स्मृति ईरानी से भी बाबा रामदेव बात करेंगे।
माना जा रहा है कि इस तरह के प्रस्ताव में संघ परिवार के साथ-साथ शिक्षा बचाओ आंदोलन समिति के संस्थापक दीनानाथ बत्रा भी शामिल होंगे। शिक्षा व्यवस्था में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बत्रा की किताबें शामिल करने पर भी विचार किया जा सकता है। बता दें कि गुजरात के स्कूलों ने बत्रा की किताबें पहले से ही पढ़ाई जा रही हैं।
बाबा रामदेव ने इस बोर्ड की पैरवी करते हुए कहा कि इसके माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति के साथ, इसकी प्राचीन तथ्यों, मूल्यों और इसकी विशालता का पता चलेगा। बाबा रामदेव ने गणित विषय में वैदिक गणित को भी शामिल करने की बात कही है। इसके साथ ही इतिहास में अपने महान शासकों के बारे में जानकारियों को ज्यादा विस्तार से बताने पर जोर होगा।
राष्ट्रीयता को बढ़ावा देने जोर
बाबा रामदेव ने आगे कहा कि अभी अगर हम सामाजिक विज्ञान की बात करें तो इसमें हम बच्चों को पश्चिमी विचारों से रूबरू कराते हैं। हम बताते हैं कि इंसान एक सामाजिक प्राणी है। लेकिन क्या हम इसे ऐसे नहीं कह सकते कि इंसान भगवान का उपहार है? वह भगवान की सबसे अच्छी रचना है। इस बदलाव से बच्चों को अपने पूर्वजों और खुद को समझने में ज्यादा फायदा होगा।
फिलहाल बीबीएसई मॉडल का विचार बाबा रामदेव को 'आचार्यकुलम' से आया है। 'आचार्यकुलम' स्कूल की स्थापना खुद बाबा रामदेव हरिद्वार में की थी। जिसका उद्घाटन पिछले साल अप्रैल में नरेंद्र मोदी ने की थी। इस स्कूल में 400 के करीब छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। जिन्हें संस्कृत, वेद और शास्त्र की पढ़ाई कराई जाती है। बाबा रामदेव के साथ उनकी इस योजना में आचार्य बालकृष्ण भी शामिल हैं।
हालांकि बाबा के विचार से जुड़े स्कूल अभी भी चल रहे हैं। जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से संचालित विद्या भारती स्कूल और आर्य समाज की ओर से संचालित गुरुकुल में इसी तर्ज पर पढ़ाई होती है। ये बातें आचार्य बालकृष्ण ने कही है। उन्होंने बताया कि अगर बाबा के विचारों को आगे बढ़ाया गया और नए बोर्ड का गठन हुआ तो इससे बच्चों के साथ सभी को फायदा मिलेगा।