भारत में क्यों बंद हो गए 300 बिजनेस-स्कूल?
(फोटोः सौजन्य से स्क्रॉल डॉट इन)
देश में आर्थिक उदारीकरण के बाद जब अर्थव्यवस्था में उछाल आया तो बरसात के कुकुमुत्तों की तरह जगह-जगह बिजनेस स्कूल खुले गए थे, लेकिन कि अब ये बिजनेस स्कूल बहुत ही तेजी के साथ बंद हो रहे हैं।
वेब साइट स्क्रॉल डॉट इन के मुताबिक, 2012 से 2015 के बीच 300 से ज्यादा बिजनेस स्कूलों की दुकानदारी बंद हुई है। इससे यह माना जा रहा के देश्ा के मध्य वर्गीय लोगों में कभी जो कंपनी प्रबंधन की तालीम का सपना था वह खत्म हो रहा है।
वर्तमान में देश में 3,217 संस्थाएं ऐसी हैं जो मास्टर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन(एमबीए) की डिग्री बांटते हैं। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एडुकेशन के आंकड़ों के अनुसार 2011-12 के दौरान इस प्रकार की संस्थाओं की संख्या 3,541 थी।
आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि झारखंड, बिहार और केरल को छोड़कर बाकी सभी सभी राज्यों में बिजनेस स्कूलों की संख्या घट रही है। बिजने स्कूलों की सबसे ज्यादा संख्या घटने वाले राज्यों में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है।
टॉप सस्थानों के छात्रों को मिलती है कामयाबी
एआईसीटीई के अनुसार, 2007 और 2012 के बीच देश में 927 नए बिजनेस स्कूल शुरू हुए थे और इन स्कूलों की संख्या हर साल सात प्रतिशत की दर से बढ़ भी रही थी।
लेकिन पिछले कुछ सालों से अर्थव्यवस्था में आई गिरावट से और टॉप संस्थानों के छात्रों को नौकरी मिलने से छोटे और नए संस्थानों के लिए बाजार में रहने के लिए काफी मुश्किल हो गया जिससे ये स्कूल बंद होने लगे।
वहीं इस पर 2014 में आई रिपोर्ट बताती है कि तमाम संस्थाओं की शिक्षा नीति ऐसी है जो इंडस्ट्री में खास न तो योगदान दे पाते हैं और न ही यहां से पढ़ने वाले युवा उद्योग जगत में कोई प्रभाव छोड़ पाते हैं।
इससे साबित होता है कि इन संस्थाओं की एजुकेशन क्वालिटी भी ऐसी नहीं है जो कि यहां से पढ़ने वाले छात्रों को किसी मुकाम तक पहुंचा सकें। वहीं बी स्कूलों को लेकर 2015 में आई फाइनैंशियल टाइम्स की ग्लोबल एमबीए रैंकिंग में भारत के मात्र तीन संस्थानों को ही जगह मिल पाई है।