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आजम ने जताया ताजमहल पर हक, फिरंगी ने मिलाई हां में हां

Thu, 20 Nov 2014 03:48 PM IST
Updated Thu, 20 Nov 2014 03:48 PM IST
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azam khan made taj mahal a political issue

उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार उभर रहे नए-नए मुद्दों के बीच 'मोहब्बत की मजार' के तौर पर मशहूर आगरा का ताजमहल भी अब सियासी मुद्दा बनता नजर आ रहा है। प्रदेश के शहरी विकास और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री आजम खान का बयान तो इसी तरफ इशारा करता है।

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समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान ने मांग उठाई है कि ताजमहल को राज्य वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित किया जाए। आजम ने पिछले दिनों लखनऊ में वक्फ बोर्ड के सदस्यों के बीच मुस्लिम नेताओं के साथ एक मीटिंग में यह मुद्दा उठाया।
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आजम ने कहा कि ताजमहल को प्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति घोषित करते हुए इसके रखरखाव का जिम्मा उन्हें दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि आजम खान खुद वक्फ मामलों के मंत्री भी हैं। फिलहाल ताजमहल के रखरखाव की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास है।

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'ताजमहल के अंदर मिले नमाज की इजाजत'

azam khan made taj mahal a political issue

इस बीच लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली ने भी इस मुद्दे को हवा दे दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मांग की है कि ताजमहल को मुसलमानों को नमाज के लिए खोला जाए।

उन्होंने कहा, 'हमारी मांग है कि ताजमहल के अंदर मुसलमानों की पांच वक्त की नमाज अता करने की इजाजत मिले। इस मामले को लेकर हमने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को एक ज्ञापन भी सौंपा है और उम्मीद है कि वे इसपर सकारात्मक रुख अपनाएंगे।'

वहीं, दूसरी तरफ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस मामले को हवा दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि ताजमहल में दर्शकों के लिए ई-टिकटिंग की व्यवस्‍था की जाए।

रैलियों के मंच से गूंजेगा ताजमहल का मुद्दा!

azam khan made taj mahal a political issue

अखिलेश यादव ने पत्र में लिखा है कि ‌ताजमहल देखने के लिए स्‍वदेशी और विदेशी दर्शकों को एएसआई की खिड़की पर घंटों कतार में खड़ा होना पड़ता है। हमने पहले भी केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अफसरों से इस संबंध में बात की, लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला।

अखिलेश ने कहा कि ताजमहल के सुरक्षा इंतजाम देखकर ऐसा लगता है जैसे हम किसी हवाईअड्डे पर आए हों। ताजमहल के बाहर एएसआई को टिकट के लिए ज्यादा खिड़की खोलनी चाहिए, ताकि दर्शकों की परेशानी कम हो।

कुल मिलाकर देखा जाए तो ताजमहल सियासी मुद्दा बनता जा रहा है। राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के इस मामले को उठाने के बाद यह तय है कि आने वाले चुनाव में राजनीतिक रैलियों के मंच से दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल का जिक्र भी जरूर होगा।

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