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ट्रिपल एस की तर्ज पर करेंगे छात्राओं को जागरूक

Sun, 31 Aug 2014 03:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रोहतक
अमर उजाला ब्यूरो/रोहतक Updated Sun, 31 Aug 2014 03:04 AM IST
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पुलिस को अपना रवैया सुधारना होगा। कोई भी घटना होने पर लड़कियों और महिलाओं का सबसे पहले सिपाही और इंस्पेक्टर लेवल के अधिकारी से पाला पड़ता है।

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जानकारी मिली है कि इनका रवैया सही नहीं होता। ऐसे में इन्हें बोलने और व्यवहार में सुधार लाना होगा ताकि लड़कियां बेखौफ बात कह सकें।

मधु और निकिता आत्महत्या कांड को लेकर रोहतक पहुंची क्राइम अगेंस्ट वुमेन आईजी डॉ. सुमन मंजरी पुलिसिया रवैया से खफा नजर आईं।

कहा, महिलाओं और लड़कियों के प्रति बढ़ रहे अपराधों को रोकने के लिए ट्रिपल एस की तर्ज पर बेटियों को जागरूक करना होगा। पुलिस मुख्यालय पहुंच महिला हेल्पलाइन 1091 पर शिकायतों की जानकारी ली।
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आईजी ने बताया कि प्रदेश के हरेक जिले में महिला थाने खोले जाएंगे। मामला पाइपलाइन में है और जल्द मंजूरी मिल जाएगी।

यूं समझिए ट्रिपल एस को
रोहतक में दो छात्राओं और हिसार में एक छात्रा का छेड़छाड़ से परेशान होकर आत्महत्या करना बेहद संवेदनशील मामला है। ऐसी वारदात दोबारा न हो, इसके लिए हरियाणा पुलिस की ओर से पूरे प्रदेश में ‘ट्रिपल एस’ की तर्ज पर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा।
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ट्रिपल एस का मतलब है स्पेस, स्पीच और शेयर। स्पेस मतलब स्थान। लड़कियों को घर, स्कूल व कॉलेज के साथ समाज में अनुकूल स्थान देना ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। स्पीच मतलब बोलना।

लड़कियों को आत्मविश्वास बढ़ाना होगा ताकि वे घर, कॉलेज, स्कूल, अथॉरिटी स्तर पर खुले तौर पर अपनी बात रख सकें। तीसरा एस मतलब शेयर अर्थात हिस्सा।

लड़कियों को बताना होगा कि लड़कों का घर में हिस्सा है तो लड़कियों का भी बराबर का ही हक है। उन्हें आश्वस्त करना होगा कि कानून उनके साथ है और उनकी सुरक्षा के लिए है। लड़कियों को हिम्मत भी देनी होगी।

ये बताएंगे अभियान में
प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों में ट्रिपल एस के तर्ज पर जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। छात्राओं को बताया जाएगा कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों के खिलाफ क्या कानून है, किन धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया जा सकता है, किन परिस्थितियों में वे क्या कर सकती हैं? बताना होगा कि अधिकारों, सुरक्षा, घरेलू हिंसा से बचाने के लिए सभी तरह के कानून हैं।

लड़कों को भी करेंगे जागरूक
छात्राओं के खिलाफ हो रहे अपराध रोकने के लिए लड़कों को भी जागरूक किया जाएगा ताकि वे भी अपराधों से दूर रहें। उन्हें भी नैतिक जिम्मेदारी सोचते हुए सभ्य समाज के निर्माण में भागीदार होना चाहिए।

लड़कियों के स्कूलों व कॉलेजों के बाद लड़कों के स्कूल-कॉलेजों में भी जागरूकता अभियान चलाए जाने का विचार है।
आत्महत्या मामले की रिपोर्ट तलब  
आईजी ने इससे पूर्व पुलिस अधिकारियों की बैठक ली और दोनों छात्राओं की मौत मामले की जांच रिपोर्ट तलब की। उन्होंने एसपी सौरभ सिंह से जिला पुलिस की ओर से बेटियों को सुरक्षित माहौल देने संबंधी प्रबंधों की समीक्षा की। बैठक में डीएसपी करण गोयल, डीएसपी पुष्पा खत्री मौजूद रहे।

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