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ऑटो रिक्शा ड्राइवर की बेटी ने किया सीए की परीक्षा में टॉप

Wed, 23 Jan 2013 01:19 AM IST
मुंबई/एजेंसी
मुंबई/एजेंसी Updated Wed, 23 Jan 2013 01:19 AM IST
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auto driver daughter Prema tops all India CA exam

बेटियां बेटों से कतई कमतर नहीं हैं। एक बार फिर यह हकीकत सामने आई है। मुंबई की प्रेमा जयकुमार ने अपने जीवन की तमाम बाधाओं को पार करते हुए ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिस पर कोई भी गर्व कर सकता है। प्रेमा ऑटो रिक्शा ड्राइवर की बेटी हैं और उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की अखिल भारतीय परीक्षा में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है।

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प्रेमा अपने माता-पिता और भाई के साथ मुंबई के उपनगर मलाड में एक कमरे वाली चाल में रहती हैं। नवंबर 2012 में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा ली गई परीक्षा के परिणाम सोमवार को घोषित किए गए। इसके बाद से 24 वर्षीया प्रेमा और उनके परिवार की खुशियों को पंख लग गए हैं।
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प्रेमा से मीडिया से बातचीत में कहा, ‘यह मेरे लिए लाइफ टाइम एचीवमेंट है। यह मेरी कड़ी मेहनत का नतीजा है।’ इसके बावजूद सफलता का असली श्रेय वह अपने माता-पिता को देती हैं। प्रेमा ने सीए की परीक्षा में 800 में से 607 नंबर हासिल किए।
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प्रेमा का परिवार मूल रूप से तमिलनाडु का है, जो पिछले कुछ वर्षों में मुंबई में है। आजीविका के लिए प्रेमा के पिता जयकुमार पेरूमल ऑटो रिक्शा चलाते हैं। जबकि प्रेमा की मां गृहिणी हैं। प्रेमा चाहती हैं कि अभी तक जीवन में कठिनाइयां उठाने वाले माता-पिता को वह अब सुख-सुविधाएं दे सकें। प्रेमा ने बताया कि मेरे माता-पिता ने मेरी पढ़ाई-लिखाई में कोई कमी नहीं होने दे और हर तरह से उसके लिए धन उपलब्ध कराया।

प्रेमा के 22 वर्षीय भाई ने भी बहन के साथ सीए की कठिन परीक्षा पास की है। दोनों भाई-बहन ने नवंबर में साथ में इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंट्स ऑफ इंडिया की परीक्षा दी थी। प्रेमा इससे पहले भी पढ़ाई में अपनी योग्यता साबित कर चुकी हैं। मुंबई यूनिवर्सिटी की बीकॉम तीसरे वर्ष की परीक्षा में वह दूसरे नंबर पर रही थीं। तब उनके 90 प्रतिशत अंक आए थे।


श्रेय माता-पिता को
प्रेमा जयकुमार ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। एक स्थानीय कंपनी में आर्टिकलशिप करने करने वाली प्रेमा के अनुसार, ‘माता-पिता के आशीर्वाद के बगैर यह कामयाबी असंभव थी। उन्होंने मुझे हमेशा बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया, अब मैं उनके लिए कुछ अच्छी चीजें करना चाहती हूं।’

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