पीएम के दौरे में खलल की कोशिश नाकाम, तालिबान की थी साजिश
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अफगानिस्तान का दौरे के दौरान भारतीय वाणिज्य दूतावास पर आत्मघाती हमला हो सकता था, हालांकि अफगानी खुफिया एजेंसी नेशनल डायरेक्टोरेट सर्विस ने हमले को विफल कर दिया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को पहली बार अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के दौरे पर जा रहे हैं। तालिबानी आतंकियों ने उसी दिन अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बसे शहर जलालाबाद में बने भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमले की योजना बनाई थी।
भारतीय खुफिया सूत्रों ने बताया कि अफगानी एजेंसी ने हमलावर की पहचान कारी नासिर के रूप में की। ये अफगानिस्तान के कपिसा प्रांत के तैगब जिले का एक छात्र है। नासिर ने पूछताछ में अफगानी एजेंसी को बताया कि उसने पाकिस्तान में आतंकी प्रशिक्षण लिया था। पेशावर स्थित तालिबान के एक कार्यालय से उसने अंतिम आदेश दिया गया था। उल्लेखनीय है कि 2014 अफगानिस्तान के हेरात शहर के भारतीय दूतावास पर भी आतंकी हमला हो चुका है।
ISI से जुड़े आतंकी ने रची साजिश
अफगान एजेंसी ने बताया कि तालिबानी आतंकी के पास एक माइक्रो कैमरा था, जिसे उसने अपने कैमरे में छिपा रखा था। उस कैमरे से वह दूतावास में किए गए सुरक्षा इंतजामों की फिल्म बनाने वाला था। उसके पास जीपीएस लगी एक घड़ी भी थी।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि भारतीय दूतावास पर हमले की योजना संभवतः तालिबाल सरगना अख्तर मोहम्मद मंसूर के नेटवर्क ने बनाई रही होगी, इसी ने 1999 में एयर इंडिया के विमान के अपहरणकर्ताओं के मदद की थी। मंसूर की पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से भी नजदीकी है।
मंसूर का लश्कर-ए-तैयबा और तालिबान के उप प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी के नेटवर्क से भी जुड़ाव है। अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास पर हमले में इन संगठनों की भूमिका रही है।