अमर उजाला हमला: फोन कर बुलाया, बनाई वीडियो
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भले विकास ही हमले का मास्टरमाइंड प्रतीत हो रहा हो पर माना जा रहा है कि ऐसा उसने किसी के आदेश पर किया है। संभव है कि उसे पैसे का लालच दिया गया हो। उसकी गिरफ्तारी से साजिश के और पन्ने खुलेंगे।
पहले आसाराम बापू केस के गवाहों पर एक के बाद एक हमले हुए। अब निशाने पर मीडिया है। कुछ दिन पूर्व नारायण साई समर्थक आगरा में ही एक और समाचार पत्र समूह के दफ्तर पर रौब गालिब करने गए थे। हालांकि वहां वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए थे।
पुलिस भी हमले की दो वजहें मान रही है। एक तो दहशत में आकर मीडिया आसाराम बापू और नारायण साई पर खबरें लिखने से बचे। दूसरा दूर हो रहे समर्थकों में मनोबल बढ़ाने वाला संदेश जाए कि आसाराम और नारायण साई की टीम अब भी सक्रिय है।
हेमामालिनी ने की सख्त कार्रवाई की मांग
अमर उजाला कार्यालय पर हुए हमले की सांसद हेमामालिनी ने कड़ी निंदा करते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। उधर उपजा के पत्रकारों ने बैठक करके इस प्रकरण में जल्द कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
हमले को गंभीरता से लेते हुए फिल्म स्टार एवं मथुरा की सांसद हेमामालिनी ने बयान जारी कर कहा कि यह निंदनीय है और ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अविलंब होनी चाहिए।
हेमामालिनी ने कहा कि कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए ताकि स्वच्छ एवं स्पष्ट पत्रकारिता में अलग पहचान रखने वालों पर हमले की कोई सोच भी न सके।
शहर में ब्रज प्रेस क्लब पर बुधवार को उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी हमले की निंदा की गई। यहां पत्रकारों ने कहा कि जल्द कार्रवाई न हुई तो धरना, प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में जिले के राजकुमार गौतम, पवन नवरत्न, मोहनश्याम शर्मा, सुशील गोस्वामी आदि मौजूद रहे।
एक-एक को फोन कर बुलाया था
अमर उजाला के आगरा दफ्तर पर मंगलवार शाम नारायण साईं समर्थकों का हमला मीडिया में दहशत फैलाने की सुनियोजित साजिश थी। पुलिस की जांच शुरू होते ही इस पर से परदा उठने लगा है।
सभी अलग-अलग फोन करके अमर उजाला पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। तोड़फोड़, हमला और इसकी वीडियो रिकार्डिंग के लिए अलग-अलग लोगों को बाकायदा जिम्मेदारी बांटी गई थी।
गिरफ्तार आरोपियों हरिओम और देवेश से पुलिस ने पूछताछ की तो वे सिर्फ तीन और हमलावरों के नाम बता पाए। उन्हें यही नहीं मालूम था कि उनके साथ हमला करने आए युवक कौन हैं। उन्होंने बताया कि सभी को विकास नाम के शख्स ने फोन किया था
इन्हें तीन ग्रुप बनाकर अलग-अलग टास्क दिए गए थे। एक ग्रुप को दफ्तर में घुसते ही हंगामा करना था। दूसरे को तोड़फोड़ और तीसरे को मोबाइल से वीडियो रिकार्डिंग।
पूरी घटना की बनाई गई वीडियो
पुलिस ने बताया कि इनसे विकास ने कहा था कि उसे हमले के तुरंत बाद वीडियो रिकार्डिंग चाहिए। इसी प्लान के तहत रिकार्डिंग करने वाले दो युवक सबसे पहले गेट की ओर भागे। तोड़फोड़ करने वाले उनके बाद गए। सबसे आखिर में वे भागे जिन्हें हंगामा करने का टास्क मिला था।
माना जा रहा है कि वीडियो रिकार्डिंग का मकसद इसे सोशल मीडिया में प्रसारित कर प्रिंट मीडिया धमकाना था कि नारायण साई और आसाराम बापू के बारे में खबर लिखने का अंजाम क्या हो सकता है। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने कहा है कि पुलिस न केवल आरोपियों को गिरफ्तार करेगी बल्कि पूरी साजिश का पर्दाफाश भी किया जाएगा।