फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   atmasthanand and narendra modi

जानिए उन्हें, जिन्होंने मोदी को नहीं बनने दिया संन्यासी

Mon, 04 May 2015 02:54 PM IST
Updated Mon, 04 May 2015 02:54 PM IST
विज्ञापन
atmasthanand and narendra modi

आपको शायद ही पता हो कि पिछले साल 26 मई को जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उस समय उनके शूट की जेब में एक फूल था। ये फूल दरअसल 'प्रसाद' था, जिसे स्वामी आत्मआस्थानंद ने भेजा था।

विज्ञापन


95 वर्षीय स्वामी आत्मआस्थानंद कोलकाता स्थित बेल्लूर मठ के मुख्य संत और और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरु हैं। नरेंद्र मोदी 9 मई की दो दिनों की यात्रा पर कोलकाता जा रहे हैं, जहां वे आत्मआस्थानंद से भेंट करेंगे।
विज्ञापन


नरेंद्र मोदी के जीवन में रामकृष्ण मिशन के इस संत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने ही मोदी को उनकी युवावस्था में राजनीति में आने की सलाह दी, जिसकी बदौलत देश ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखा।
विज्ञापन
विज्ञापन


9 मई को उनसे मुलाकात कर मोदी अपना पुराना वादा निभाएंगे। पिछली बार मोदी ने उनसे 2013 में मुलाकात की थी, उस समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

1966 में हुई थी मोदी और आत्मआस्‍थानंद की भेंट

atmasthanand and narendra modi

नरेंद्र मोदी ने अपनी पिछली मुलाकात में स्वामी आत्मआस्‍थानंद से दोबारा मिलने का वादा किया ‌था। आत्मआस्‍थानंद से मोदी की पहली मुलाकात 1966 में हुई थी। दरअसल 1966 में वे गुजरात के राजकोट शहर के रामकृष्‍ण मिशन आश्रम के प्रमुख बनाए गए थे।

विवेकानंद के जीवन और कार्य से प्रभावित नरेंद्र मोदी ने उन्हीं दिनों राजकोट स्थिति रामकृष्‍ण मिशन आश्रम में शरण ली थी।

उल्लेखनीय है कि विवेकानंद ने ही रामकृष्‍ण मिशन की स्‍थापना की थी। नरेंद्र मोदी उन दिनों युवा थे और उनका मन संन्यास की ओर झुका हुआ था। रामकृष्‍ण मिशन आने से पहले कई वर्षों तक वह घूमते रहे और अध्यात्म ज्ञान की तलाश करते रहे।

आत्मआस्‍थानंद ने मोदी को संन्यासी बनने से रोका था

atmasthanand and narendra modi

राजकोट आश्रम में आत्मआस्‍थानंद की सान्निध्य में कुछ समय तक रहने के बाद, मोदी ने उनसे संन्यासी बनने की इच्छा जताई। उस समय आत्मआस्‍थानंद ने उनसे कहा कि संन्यास उनके लिए नहीं बना है।

हालांकि मोदी संन्यासी बनने का मन बना चुके थे। राजकोट आश्रम ने जब संन्यास की दीक्षा नहीं दी, तो वे बेल्लूर चले गए।

आत्मआस्‍थानंद ने उस समय के बेल्लूर मठ प्रमुख स्वामी माधवानंद को एक पत्र लिखा। मोदी वह पत्र लेकर बेल्लूर गए, हालांकि वहां भी उन्हें संन्यास की दीक्षा नहीं दी गई। वहां मोदी से कहा गया ‌कि वे लोगों के लिए काम करें, उन्हें समाज से अलग-थलग होने की आवश्यकता नहीं है।

9 मई को फिर होगी मोदी और आत्मआस्‍थानंद की भेंट

atmasthanand and narendra modi

मोदी बेलुर से लौटकर एक बार फिर आत्मआस्‍थानंद के पास आए। आत्मआस्‍थानंद ने उन्हें समाज की सेवा करने की सलाह दी, जिसके चंद दिनों बाद ही वह आरएसएस में शामिल हो गए। संघ में काम करते हुए मोदी राजनीति में आ गए।

मोदी ने जब पिछली बार आत्मआस्‍थानंद से भेंट की तो वे पूरी तरह स्वस्‍थ्य थे और दोनों ने ही लंबी बात की। मोदी उनके पैरों के पास बैठे थे और उनका आशीर्वाद भी लिया।

हालांकि इस बार शायद वैसी मुलाकात न हो, आत्मआस्‍थानंद फरवरी से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed