साध्वी अखाड़े को जमीन आवंटित करने का अखाड़ा परिषद ने किया विरोध
हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ मेले में 'शाही स्नान' के लिए महिला अखाड़े को जमीन आवंटित किए जाने के प्रशासन के फैसले से साधु समाज नाराज हो गया है। उनका कहना है कि प्रशासन ने 'परी अखाड़ा' को जमीन आवंटित करके देश में साधुओं की सर्वोच्च संस्था के फैसले के खिलाफ जाने का काम किया है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरी ने इसका विरोध करते हुए कहा, 'यह निर्णय साधुओं की सर्वोच्च संस्था द्वारा लिए गए फैसले के खिलाफ है।' उन्होंने कहा परी अखाड़े को एबीएपी से मान्यता नहीं मिली है जिसकी वजह से उन्हें 2013 में इलाहाबाद और 2015 में नासिक महाकुंभ में जमीन आवंटित नहीं की गई थी। इसके अलावा उन्हें दोनों कुंभ मेलाओं के आयोजन के दौरान शाही स्नान में भी हिस्सा नहीं लेने दिया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि उनके पास अब तक 180 आवेदन आए हैं जिसमें से 167 का निपटारा कर दिया गया है लेकिन परी अखाड़ा को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक परी अखाड़े ने 30,000 वर्ग फीट जमीन के आवंटन के लिए आवेदन किया था लेकिन उन्हें महज 10,000 वर्ग फीट ही उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
साध्वी ने दी चेतावनी
इस मामले पर मेला अधिकारी एसए मुरुगेशन का कहना है कि अखाड़ा परिषद के अधिकारियों से बातचीत के बिना किसी तरह के जमीन का आवंटन नहीं किया जाएगा। वास्तिवकता तो यह है कि कई ऐसे अखाड़े हैं जो अर्धकुंभ की बजाय उज्जैन में आयोजित होने वाले महाकुंभ में शामिल होना चाहते हैं लेकिन बावजूद इसके अगर वे अर्धकुंभ में भी जमीन चाहते हैं तो प्रशासन उनके आवेदनों पर विचार करेगा।
इस पूरे मामले पर अखाड़ा परी की संस्थापक साध्वी त्रिकाल भवन्त सरस्वती का कहना है कि साधु समाज महिला साध्वियों के साथ भेदभाव कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी की अगर मेला प्रशासन उन्हें जमीन आवंटित करने से मना कर देता है तो परी अखाड़ी की साध्वियां देशभर में विरोध प्रदर्शन करेंगी। साध्वी ने यह भी कहा कि वह इस अन्याय के खिलाफ अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगी।
साध्वी भवन्त सरस्वती ने इलाहाबाद में 2013 में अखाड़ा परी की स्थापना की थी। जिसके बाद साधुयों ने इसका विरोध किया था। साध्वी के मुताबिक उनके अखाड़े से करीब दस हजार साध्वियां जुड़ी हैं जो अपने साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने में जरा भी नहीं कतराएंगी।