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त्रिपुरा, नगालैंड व मेघालय में फरवरी में चुनाव

Fri, 11 Jan 2013 09:15 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 11 Jan 2013 09:15 PM IST
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assembly polls in Tripura Meghalaya Nagaland on February

चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पूर्वोत्तर के तीन राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में फरवरी माह में विधानसभा चुनाव कराने का ऐलान किया। चुनाव की घोषणा किए जाते ही तीनों राज्यों में तत्काल प्रभाव से आदर्श चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है।

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मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत ने बताया कि त्रिपुरा में 14 फरवरी तथा मेघालय एवं नगालैंड में 23 फरवरी को मतदान होगा। आयोग ने इसी के साथ मिजोरम, पंजाब, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार और महाराष्ट्र में रिक्त विधानसभा सीटों के लिए भी 23 व 24 फरवरी को उपचुनाव कराने की घोषणा की है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि तीनों राज्यों में एक साथ 28 फरवरी को मतगणना कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि मेघालय विधानसभा का कार्यकाल 10 मार्च तथा त्रिपुरा विधानसभा का 16 मार्च और नगालैंड विधानसभा का कार्यकाल 18 मार्च को खत्म हो रहा है।
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इन तीनों ही राज्यों में विधानसभा की साठ-साठ सीटें हैं। मेघालय की साठ सीटों में से 55 तथा नगालैंड में 59 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। त्रिपुरा में 10 सीट अनुसूचित जाति तथा 20 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

संपत ने बताया कि इन तीनों राज्यों में चुनाव संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और पुलिस को तैनात किया जाएगा। पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों में मतदान सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक होगा जबकि उपचुनाव वाले राज्यों में मतदान सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक होगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि पंजाब में मोगा, उत्तर प्रदेश में भाटपार, मिजोरम में चालफिल्ह और पश्चिम बंगाल में विधानसभा की नलहटी वीरभूम, इंगलिश बाजार और रेजीनगर सीटों के लिए 23 फरवरी को उपचुनाव होगा। इसी प्रकार असम में अलगापुर, बिहार में कल्यानपुर (सुरक्षित) और महाराष्ट्र में चांदगढ़ सीट पर 24 फरवरी को मतदान कराया जाएगा।

अपराधियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगे
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को कहा कि वह चाहता है कि अपराधियों और जघन्य अपराध में आरोपी लोगों के चुनाव लड़ने पर तत्काल रोक लगाई जाए। अगले लोकसभा चुनाव से पूर्व ऐसा किए जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत ने कहा कि आयोग तत्काल इस तरह का नियम लागू करने के पक्ष में है।

सजायाफ्ता उम्मीदवारों और रेप तथा हत्या जैसे जघन्य अपराध में आरोपी लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने का प्रस्ताव वर्ष 1998 से सरकार के पास लंबित है। यह प्रस्ताव चुनाव आयोग की ओर से सरकार के पास भेजा गया है।


मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि आयोग सिर्फ सजायाफ्ता लोगों के चुनाव लड़ने पर ही रोक का पक्षधर नहीं है, बल्कि वह चाहता है कि संगीन अपराधों में आरोपी भी चुनाव नहीं लड़ पाएं। इस मामले में चुनाव आयोग की ओर से किए जा रहे प्रयास के बारे में पूछे जाने पर संपत ने कहा कि आयोग प्रस्ताव पर मंजूरी हासिल करने की कोशिश में लगा हुआ है।

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