समझौता धमाके के आरोपी असीमानंद को हत्या का डर
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली-लाहौर समझौता एक्सप्रेस धमाका मामले के आरोपी नाबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद की जमानत को उच्च अदालत में चुनौती नहीं देगी।
एनआईए के इस कदम से उसके बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन, असीमानंद जमानत की शर्तों को पूरा नहीं कर रहा, ताकि वह जेल के भीतर ही रहे।
एनआईए व संबंधित सुरक्षा एजेंसियों में यह चर्चा है कि असीमानंद को जेल के बाहर अपनी जान का डर है। इसलिए वह बाहर आने की कोई गंभीर कोशिश नहीं कर रहा है। यही वजह है कि असीमानंद ने मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ धमाका मामले में जमानत के लिए अर्जी नहीं दी है।
सूत्रों के मुताबिक समझौता मामले में मिली जमानत के आधार पर इन दो मामलों में भी उसे आसानी से जमानत मिल सकती है। लेकिन मामले से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि 78 साल के असीमानंद ने जेल के भीतर ही बने रहने का मन बना रखा है।
जान को खतरा
गृह मंत्रालय ने लोकसभा में कहा कि एनआईए ने तकनीकी आधार पर 28 अगस्त 2014 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से असीमानंद को दी गई जमानत का विरोध नहीं करने का फैसला किया है।
गृह राज्यमंत्री हरीभाई पराथीभाई चौधरी ने सदन में एक लिखित जवाब में कहा कि असीमानंद जमानत की शर्तों को पूरा नहीं कर रहा, इसलिए वह जेल में है।
हाईकोर्ट में जमानत के लिए पेश होने वाले वकील और भाजपा के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि असीमानंद ने जमानत बांड इसलिए नहीं भरा, क्योंकि वह मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ धमाके का भी आरोपी है जिसमें उसे जमानत नहीं मिली है।
भाजपा के लीगल सेल के संयोजक रह चुके जैन को मोदी सरकार ने हाल ही में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया है। सूत्रों का कहना है कि असीमानंद के बाहर नहीं आने का कारण तकनीकी नहीं बल्कि व्यक्तिगत है। उसने कई मौकों पर अपनी जान को खतरा का अंदेशा जताया है।