आसिफ की गिरफ्तारी पर क्या बोले उसके परिजन?
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वैसे तो दोपहर में ही अलकायदा चीफ भारत उपमहाद्वीप आसिफ को दिल्ली में पकड़े जाने की खबरें आ रहीं थीं लेकिन तब परिजनों को यकीन नहीं हो रहा था। उन्हें लग रहा कि हो सकता है कि इस नाम का कोई और व्यक्ति हो।
आसिफ के छोटे भाई सादिक उर्फ शेरू ने बताया कि बुधवार को शाम जब टीवी पर उन्होंने आसिफ का फोटो देखा तो लगा कि भाई को ही पकड़ा गया है। सादिक ने बताया कि वह तो सन्न रह गए थे। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें?
उन्होंने तत्काल किसी को नहीं बताया लेकिन उसके बाद जब बड़े भाई को पता लगा तो उन्होंने घर आकर बताया। घर में कोहराम मच गया। आखिर ऐसा कैसे हुआ? कोई कुछ बताने की स्थिति में नहीं था। बूढ़े पिता को जब पता लगा तो वे तो सदमे में आ गए। कुछ देर तक माथा पकड़ कर बैठ गए। बाकी परिजनों ने उन्हें हौसला दिया।
इसके बाद वे थोड़ा सामान्य हुए लेकिन पूरी रात उन्हें नींद नहीं आई। उनका कहना था कि मेरा बेटा तो पुराना सामान बेचकर गुजारा करता था। वह आतंकी कैसे हो सकता है। वहीं गिरफ्तारी की खबर सुनकर कई करीबी घर पहुंचे।
उन्होंने हमदर्दी जाहिर की। परिजन काफी परेशान नजर आए। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि आसिफ पर इतना बड़ा इल्जाम, यकीन नहीं होता है, क्योंकि क्योंकि वे हर-छोटे बड़े के साथ बेहद अच्छे व्यवहार से पेश आते थे।
पुराना सामान बेचने का कारोबार करता था आसिफ
संभल। संदिग्ध आतंकी मोहम्मद आसिफ के बारे में परिजनों और मोहल्ले वालों ने बताया कि वह यहां पर पुरानी वाशिंग मशीन और कुछ अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण बेचने का काम करता था। प्रति सप्ताह रविवार को दिल्ली जाता था और जामा मस्जिद इलाके से खरीदारी करके लाता था। संभल के नखासा में पुराने सामान का बाजार लगता है वहां से ही वह बिक्री करता था और अपनी दुकान बनवाने की तैयारी कर रहा था।
मात्र सातवीं कक्षा तक पढ़ा है आसिफ
दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने अलकायदा का इंडिया चीफ बताया है वह मात्र सातवीं कक्षा तक पढ़ा हुआ है लेकिन फेसबुक और व्हाट्स एप का इस्तेमाल वह करता था।
सोशल मीडिया के माध्यम से ही आतंकियों के संपर्क में आया। दिल्ली पुलिस के बताए पर यकीन किया जाए तो इसी के माध्यम से वह आतंकी नेटवर्क के संपर्क में आया। वह जून 2013 में अलकायदा के नेटवर्क से जुड़ा था। इसके बाद उसके कदम बढ़ते चले गए।
दीपासराय में आसिफ का अपना पैतृक मकान है। उस मकान का बंटवारा हुआ था तब उसे हिस्सा मिला था। आसिफ ने अपने हिस्से का मकान बेच दिया था और उससे मिले रुपये लेकर वह सऊदी अरब गया था।
परिजनों के मुताबिक वह सवा साल तक सऊदी अरब में रहा। लौट कर आने के बाद उसने बगिया मोहल्ले में पड़़ी अपनी जमीन पर मकान का निर्माण शुरू करा दिया था लेकिन इन दिनों काम रुका हुआ था। उसकी पत्नी आफिया और दो बच्चे साथ रह रहे हैं।
परिजनों के मुताबिक सऊदी अरब से लौटने के बाद डेढ़ वर्ष से वह संभल में ही था। अतीत में वह कॉमिक्स की बिक्री का काम करता है। उसने मैंथा की मंडी में मुंशीगिरी भी की है। उसके सगे भाई का कहना है कि पांच छह हजार रुपये कमाने वाला मामूली आदमी अलकायदा का चीफ कैसे हो सकता है।
क्या बोले आसिफ के पिता?
मुझे आसिफ के साथ 12-13 वर्ष हो गए। हमारी तो मुहल्ले तक में किसी से लड़ाई तक नहीं हुई फिर ऐसे कैसे हो सकता है। वो तो अपने बच्चों तक थप्पड़ नहीं मार सकते थे फिर उन पर इतना बड़ा इल्जाम क्यों लगा दिया। हम तो यही कहेंगे कि उन पर लगाया गया इल्जाम गलत है।
आफिया, आसिफ की पत्नी।
कोट-
हमारा पूरा खानदान बुराईयों से दूर रहा है। चोरी, डकैती और जुआ शराब तक में भी परिवार का कोई नहीं है। फिर हम कैसे मान लें कि वह अलकायदा से जुड़ा था।
अताउर्रहमान, आसिफ के पिता का बयान।
कोट-
मुझे यकीन नहीं है कि आसिफ ऐसा कोई काम कर सकता है जो देश के लिए खतरा बने। मुझे तो ऐसा लगता है कि उसे हुकूमत ने फंसाया है।
सादिक उर्फ शेरू, आसिफ के सगे भाई।