मेरठ से धरे गए ISI एजेंट के बारे में चौंकाने वाला खुलासा
सेना की खुफिया जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचाने वाला आसिफ अली आईएसआई का रेजिडेंट एजेंट था। दोनों देशों (भारत और पाकिस्तान) में आवास होने के कारण आईएसआई ने उसे इस काम लगाया और कई अहम जिम्मेदारियां दीं।
आसिफ आईएसआई के लिए देश में टैलेंट स्पॉटिंग के साथ अन्य एजेंटों को पैसे समेत अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध कराता था। मिलिट्री इंटेलीजेंस के सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई ऐसे लोगों की तलाश करता है, जिनका भारत और पाकिस्तान में आवास हो। आसिफ मेरठ का रहने वाला है।
उसकी शादी पाकिस्तान में हुई। उसकी पत्नी और बच्चे अब भी वहीं हैं। इस कारण आसिफ को पाकिस्तान आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। परिवार वहां होने से उस पर शक की गुंजाइश भी नहीं थी।
आईएसआई के एजेंटों का मुखिया
लगातार आने-जाने पर आईएसआई ने उसे टार्गेट किया और उसे भारत में रहकर यहां की खुफिया जानकारी देने के लिए तैयार कर लिया। खुफिया एजेंसी के अनुसार, आसिफ भारत में आईएसआई के एजेंटों का मुखिया था।
अहम जिम्मेदारियां थीं आसिफ के पास:
मिलिट्री इंटेलीजेंस के सूत्रों के मुताबिक, आसिफ पर मेरठ समेत अन्य छावनियों में आईएसआई द्वारा भेजे जाने वाले जासूसों को सेटल करने की जिम्मेदारी थी। साथ ही वह सैन्य छावनियों में आईएसआई के लिए टैलेंट स्पॉटिंग करता था।
आसिफ टैलेंट स्पॉटिंग के जरिए ऐसे युवाओं को तैयार करने का काम करता था, जो आईएसआई के एक इशारे पर कुछ भी करने को तैयार हों। इसके लिए आईएसआई आसिफ को मोटी रकम उपलब्ध कराती थी।
सैन्य डाटा अपडेट करती थी आईएसआई
सूत्रों के मुताबिक, आसिफ के जरिए मिलने वाली सेना से जुड़ी जानकारियों को आईएसआई अपडेट करती थी। आईएसआई उससे यह जानकारी लेती थी कि मेरठ में सेना के कौन-कौन से डिविजन हैं।
किस डिविजन ने मूव किया और कौन सा आया। डिविजन कमांडर का नाम क्या है। सेना की गाड़ियों के नंबर क्या हैं। ट्रेन कब मूव करती है। सेना के आयुध भंडार कहां हैं।
पूरी करता था स्लीपर सेल की जरूरतें:
छावनी में आम आदमी की जिंदगी बसर करने वाले स्लीपर सेल आईएसआई के लिए काम करते हैं। ये एक स्थान पर अधिकतम एक साल तक रहने के बाद अपना स्थान बदलते देते हैं। ये सीधे तौर पर आईएसआई से नहीं जुड़े होते।
इन्हें आईएसआई के इशारे पर आसिफ जैसे एजेंट ही जरूरत पड़ने पर धन और अन्य चीजें उपलब्ध कराते हैं।