वाजपेयी ने भी लौटाया साहित्य अकादमी पुरस्कार
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हिन्दी के जाने माने कवि और लेखक अशोक वाजपेयी ने भी अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया। उन्होंने यह फैसला देश में बढ़ रहे सांप्रदायिक हिंसा और लेखकों पर हो रहे हमले के विरोध में लिया।
गौरतलब है कि इससे पहले मशहूर लेखिका नयनतारा सहगल भी देश में बिगड़ते माहौल, लेखकों पर हुए जानलेवा हमले और दादरी हमले के विरोध में अपना एकादमी पुरस्कार लौटा चुकी हैं। वह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की भांजी हैं। इनसे पहले हिन्दी लेखक उदय प्रकाश भी ऐसा कदम उठा चुके हैं।
अशोक वाजपेयी ने कहा कि ऐसा बहुत ही कम देखने को मिलता कि कोई वरिष्ठ लेखक इस तरह के कठोर फैसले ले जैसा नयनतारा सहगल ने लिया। यह बहुत जरूरी था कि लेखक समुदाय पर हो रहे हमलों के विरोध में इस तरह के कड़े फैसले लिए जाएं।
मोदी पर निशाना
अशोक वाजपेयी ने अपने एक खुले पत्र 'अनमेकिंग ऑफ इंडिया' में उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान का संदर्भ लेते हुए लिखा कि भारत का संविधान सभी धर्मों के वैचारिक, धार्मिक और अभिव्यक्ति की सुरक्षा की गारंटी देता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी के राज में लेखकों की उपेक्षा हो रही है। इतना ही नहीं दादरी में गौ मांस खाने की अफवाह के बाद उन्होंने अब तक एक शब्द भी नहीं बोला। इससे साफ पता चलता है कि वे इस मुद्दे की गंभीरता की उपेक्षा कर रहे हैं। इस वक्त देश में जो माहौल है उससे लोग डर के साए में अपनी जिंदगी जी रहे हैं।