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संघ से जुडऩे पर सिंघल को पिता ने दी थी संपत्ति से बेदखल करने की धमकी

Wed, 18 Nov 2015 12:35 AM IST
Updated Wed, 18 Nov 2015 12:35 AM IST
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Ashok Singhal's father was threatening to evict property on joining Sangh

सात दशक तक हिंदुत्व की राजनीति में लगातार रमे रहने वाले विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंघल नहीं रहे। जिस राम मंदिर आंदोलन को उन्होंने नई पहचान दी, वही आंदोलन उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से माईंस इंजीनिरियंग की पढ़ाई करने वाले सिंघल को हिंदुत्व की राजनीति ऐसी भाई कि परिवार के अन्य सदस्यों की तरह सुरक्षित भविष्य के लिए बेतहर कैरियर चुनने के बदले हिंदुत्व की इंजीनियरिंग में रम गए। वह भी तब जब संघ से जुड़ने के फैसले को सुन कर आवाक डिप्टी कलक्टर पिता ने उन्हें पैतृक संपत्ति से बेदखल करने की धमकी तक डे डाली थी।

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संघ के बाद विहिप से जुड़ने पर बीती सदी के 80 के दशक ने सिंहल को हिंदुत्व की राजनीति में नई पहचान दी। इसी दशक में सिंहल ने राम मंदिर आंदोलन से पहले साधु संतों को फिर इनके माध्यम से आम लोगों को जोड़ने में सफलता पाई। इसी दशक में उन्होंने अस्पृश्यता के खिलाफ मुहिम चलाने में भी संतों को राजी करने में सफलता पाई और दलितों को हिंदू धर्म में प्रतिष्ठा दिलाने के लिए 200 से भी अधिक मंदिरों का निर्माण कराया।
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मेधावी छात्र सिंघल विद्यार्थी जीवन से ही बाद में संघ प्रमुख बने रज्जू भैया के संपर्क में रहे। इस गहरे और आत्मीय संपर्क ने उनमें खनन क्षेत्र का इंजीनियर बनने के बदले हिंदुत्व की इंजीनियरिंग में दिलचस्पी पैदा की। बहुत कम लोगों को पता है कि सिंघल एक बेहतरीन शास्त्रीय संगीत गायक भी थे। कई वाद्य यंत्रों पर उनकी अदभुत पकड़ थी। संघ के कई मुख्य गीतों को उन्होंने ही आवाज दी थी।

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बीमार पिता के साथ नहीं गए अमेरिका

Ashok Singhal's father was threatening to evict property on joining Sangh

बीते महीने अशोक सिंघल:हिंदुत्व के पुरोधा किताब के रूप में आई सिंघल की जीवनी में ऐसे कई रोचक प्रसंग हैं। उनके जन्मदिन पर प्रकाशित जीवनी का विमोचन भी सिंघल का आखिरी कार्यक्रम साबित हुआ जिसमें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गृहमंत्री राजनाथ सिंह समेत संघ व सरकार की तमाम हस्तियां भी मौजूद थी।

दरअसल पिता की संपत्ति से बेदखल करने की धमकी बेवजह नहीं थी। सिंघल के पिता डिप्टी कलेक्टर थे तो नाना उत्तर प्रदेश के नामी जमींदार। सात भाई और एक बहन वाले परिवार में सिंघल के बड़े भाई भारतीय सैनिक सेवा के तहत त्रिपुरा के बड़े प्रशासनिक अधिकारी थे तो एक भाई आईपीएस अधिकारी। दो अन्य भाई बड़े व्यवसायी थे।

ऐसे में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके अपने बेटे की फैसले से पिता के आवाक और नाराज होने की ठोस वजह थी। संघ में प्रचारक बनने के बाद सिंघल परिवार से लगभग कट गए। संघ कार्य में इस कदर लीन हो गए कि गंभीर रूप से बीमार पिता के इलाज के लिए उनके साथ अमेरिका जाने से इंकार कर दिया तो मृत्युशैय्या पर पड़ी मां के पास पहुंचने में इतनी देर हो गई कि उनकी एक झलक पाते ही मां स्वर्ग सिधार गई।

राम मंदिर आंदोलन को दी नई पहचान

Ashok Singhal's father was threatening to evict property on joining Sangh

80 के दशक में विहिप से जुड़ने के बाद सिंघल ने राम मंदिर आंदोलन को नई पहचान दी। साल 1984 में धर्म संसद बुला कर उन्होंने इस आंदोलन से साधु संतों को जोड़ कर इसे व्यापक स्वरूप दिया। धर्म संसद के मुख्य आयोजनकर्ता सिंघल ने इसे साधु संतों के बाद आम जनमानस से जोड़ दिया। सिंहल इस आंदोलन में कार सेवा के जनक भी रहे।

प्रचारक बनने के बाद अशोक सिंहल ने परिवार के सदस्यों की जिद पर कोट पेंट पहनी। इस पर रज्जू भैया ने व्यंग्य किया। इसके बाद उन्होंने पूरे जीवन में कोट पेंट नहीं पहना।

सिंघल अपने जीवन काल में दो बार जेल गए। संघ पर प्रतिबंध के खिलाफ सत्याग्रह के दौरान पहली बार 1949 में तो दूसरी बार आपातकाल के खिलाफ 1975 में। पहली बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चंद्रभानु गुप्त ने उन्हें जेल से आजादी दिलाई। हालांकि गुप्त भी उन्हें संघ को छोड़ने के लिए राजी नहीं कर पाए।

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