फेयरनेस क्रीम के विज्ञापनों पर लगेगी पाबंदी
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ऐसे विज्ञापन जिसमें दिखाया जाता है कि लड़के-लड़कियां फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करते हैं उनका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। जिंदगी में खूब तरक्की करते हैं। अब ऐसे विज्ञापन नहीं बन सकेंगे।
गोरा बनने की चाहत के चलते देश में बढ़ते रंगभेद को लेकर फेयरनेस क्रीम के भेदभाव वाले विज्ञापनों पर पांबदी लग सकती है। फेयरनेस क्रीम के विज्ञापनों में बड़े पैमाने पर दिखाया जा रहा है कि जो लड़के और लड़कियां फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करते हैं उनका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। साथ ही अपनी जिंदगी में खूब तरक्की करते हैं। पर अब ऐसे विज्ञापन नहीं बन सकेंगे।
गोरा बनाने वाली क्रीम के विज्ञापनों में अब भेदभाव नहीं दिखाया जा सकेगा। इसके लिए नई गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। अभी तक गोरा बनाने वाली फेयरनेस क्रीम के विज्ञापनों में कई बार यह दिखाया जाता था कि किसी का रंग दबा होने के कारण किसी की लड़की की शादी नहीं हो पाई। तो कोई लड़का गोरा न होने से परेशान है। पर अब ऐसा नहीं हो सकेगा।
गलत तरीके से नहीं तैयार किए जाएंगे विज्ञापन
एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड कांउसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) ने नई गाइडलाइंस जारी कर दी है। इस गाइडलाइंस के मुताबिक फेयरनेस क्रीम के लिए बनाए जाने वाले विज्ञापनों को बनाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए कि किसी से भी उसके रंग के आधार पर भेदभाव नहीं दिखाया जाना चाहिए।
इसमें दूसरे सेक्स के लोगों के प्रति आकर्षण, नौकरी, शादी, नौकरी में प्रमोशन को लेकर कोई भी भेदभाव वाला विज्ञापन नहीं बनाया जाना चाहिए।
फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन को बनाते समय नाटकीयता नहीं की जानी चाहिए। विज्ञापन के निर्माण में किसी भी मॉडल के पूर्व और बाद के चित्रों को नाटकीय और गलत तरीके से तैयार नहीं किया जाना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर यह दिखाया अब यह नहीं दिखाया जा सकेगा कि कोई लड़की या लड़का किसी फेयरनेस क्रीम का प्रयोग खूब गोरा हो गया है। या फिर उसका आत्मविश्वास बहुत बढ़ गया है।