{"_id":"7c6bcb0d47c762202dfa9c1a199274f8","slug":"asaram-should-be-punished-hard","type":"story","status":"publish","title_hn":"'फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले आसाराम का केस, मिले कड़ी सजा' ","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
'फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले आसाराम का केस, मिले कड़ी सजा'
टीम डिजिटल
Updated Thu, 05 Sep 2013 12:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आसाराम पर लगे यौन शोषण के आरोप के बाद अब परत-दर-परत और भी सच्चाइयां सामने आ रही हैं। कोर्ट ने मामले को बेहद संगीन मानते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया है। अब आसाराम को 15 सितंबर तक जेल में ही रहना होगा।
विज्ञापन
इसी बीच अमर उजाला ने अपने फेसबुक पेज पर पाठकों से 'आज की बहस' में पूछा था कि क्या चार्जशीट दायर होने के बाद आसाराम का केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाना चाहिए?
विज्ञापन
रोष से भरे ज्यादातर लोगों का यही मानना है कि आसाराम को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए और यह मामला फास्ट्रैक कोर्ट में ही चलाया जाना चाहिए।
अब्दुल मोईद फारुकी का कहना है कि बिल्कुल यह मामला फास्ट्रैक कोर्ट में चलाना चाहिए और बहुत कम रिकॉर्ड टाइम में सजा होनी चाहिए ताकि जल्द दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए।
विज्ञापन
प्रियंका पंत का मानना है कि हां बाबा का केस फास्ट ट्रैक में जाना चाहिए और जितनी जल्दी सजा मिलेगी उतना ही लोगों में इस जुर्म के प्रति खौफ बढ़ेगा रहेगा। और लोग ऐसा काम करने से पहले 100 बार सोचेंगे।
विजय बाबेरवल ने कहा कि फास्ट ट्रैक में सुनवाई होनी चाहिए क्योंकि बहुत से साधक हैं जिनकी आस्था जुड़ी हुई है। फैसला जितना जल्दी आएगा उतना सही है।
श्याम कोरी 'उदय' का मानना है कि सिर्फ आसाराम का केस नहीं वरन बलात्कार के समस्त प्रकरण फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाए जाने की आवश्यकता है। साथ ही साथ बलात्कार के प्रकरणों में फांसी तक की सजा का प्रावधान होना चाहिए ताकि अपराधियों में खौफ व्याप्त हो सके तथा पीड़ित महिलाएं व बच्चियों को समय पर उचित न्याय मिल सके !
गौरव कुमार शर्मा का कहना है कि आसाराम, बापू बाद में हैं पहले वो भारत के एक नागरिक (आम आदमी) के रूप में अपराधी हैं और जो सजा इस अपराध के लिए आम आदमी को दी जाती है उसे इससे ज्यादा मिलनी चाहिए क्योंकि यह खुद संत हैं जो दूसरों को उपदेश देते हैं।