कृपाल पर हमला करने वाला आसाराम का गुर्गा भेजा गया जेल
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शाहजहांपुर की बिटिया से दुराचार के मामले में जेल में बंद आसाराम द्वारा अपने गुर्गों के मार्फत गवाहों को प्रभावित करने और न मानने पर उनका सफाया करने के खेल का खुलासा शनिवार को यहां की पुलिस ने कर दिया।
गवाह कृपाल की हत्या के मामले में जोधपुर से पांच दिन पहले बुलाए गए आसाराम के सेवादार नारायण पांडेय उर्फ पुष्पेंद्र पांडेय को शाहजहांपुर पुलिस ने शनिवार को जेल भेज दिया। इससे पहले उसे आईपीसी की धारा 302, 120बी, 195 क और 506 के तहत केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया।
मूल रूप से गोरखपुर जिले के नारायण का पता कानपुर नगर के नौबस्ता थाना क्षेत्र के हरबंसपुम स्थित ए 255 नंबर मकान का है। यह बीते करीब 12 वर्ष से आसाराम का खास सेवादार था और जोधपुर स्थित आश्रम का प्रभारी था।
जेल में बंद आसाराम को रिहा करवाने और केस को हर हाल में खुर्द-बुर्द या खारिज कराने के लिए जिन खास 10 सेवादारों ने कमान संभाल रखी है उनमें से नारायण समेत चार ने शाहजहांपुर में गवाह कृपाल को अपनी निगरानी में मौत के घाट उतरवाया।
ठेके पर दो शूटर दोनों वारदातों में शामिल रहे
अन्य तीन में लखनऊ आश्रम का प्रभारी राघव, अहमदाबाद के आश्रम का प्रभारी अर्जुन और बरेली आश्रम का प्रभारी संजय सिंह शामिल हैं। ये सभी फरार हैं। इनमें से अर्जुन शूटरों का व्यवस्थापक है।
शाहजहांपुर और मुजफ्फनगर में जिन शूटरों का इस्तेमाल हुआ उन दोनों के नाम भी पुलिस को मिल गए, लेकिन अभी उनका खुलासा नहीं किया गया है। यहां कैंट पुलिस चौकी क्षेत्र में कृपाल को गत 10 जुलाई को गोली मरवाई थी और 11 को बरेली में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
शाहजहांपुर पुलिस के अनुसार, मुजफ्फनगर में गवाह अखिल गुप्ता के कत्ल का जो केस राज्य सरकार ने सीबीआई को सौंपा है, उसमें भी यही चारों शामिल थे। दोनों ही कत्ल इन्होंने एक ही अंदाज में और एक ही टाइम फ्रेम में कराया।
किराए के दो शूटर पहले ही साथ रखे, शिकार की पूरी रेकी की और सायं पांच बजे आश्रम से योजना क्रियान्वित करने को निकले और शिकार पर रात आठ बजे 12 बोर के असलहे से गोली मारी गई। फिर वहां से सुरक्षित ठिकाने पर निकले। हां, काम होने से पहले और होने तक ये चारों लगातार आपस में मोबाइल पर संपर्क में रहते थे और हर डेवलपमेंट का संदेशा आसाराम तक पहुंचाते थे।