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‘मुश्किल से धरा है, जमानत दी तो जाएगा गलत संदेश’
जोधपुर/ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2013 07:41 PM IST
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नाबालिग से रेप के मामले में फंसे आसाराम पर राजस्थान सरकार अपना शिकंजा ढीला नहीं करना चाहती है। बुधवार को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार ने ऐसे मजबूत तर्क रखे, जिसके आगे बचाव पक्ष की एक न चली और बाबा का जेल से बाहर आने का सपना पूरा नहीं हो सका।
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लगभग दो घंटे चली दलील में सरकार से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद पुरोहित ने कहा कि बहुत ही मुश्किल से आसाराम को गिरफ्तार किया जा सका है और ऐसे में उन्हें जमानत दी गई तो समाज में गलत संदेश जाएगा।
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आसाराम के वकीलों ने पॉस्को एक्ट और धारा 376 का विरोध करते हुए लड़की की उम्र की जांच की मांग की। मगर अदालत ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
जवाब में सरकार की ओर से दलील दी गई कि ऐसे संगीन मामले में आरोपी को जमानत मिल गई, तो समाज में गलत संदेश जाएगा।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने यह भी कहा कि आसाराम ने समन की अवहेलना की और पुलिस को छकाया। उन्हें बड़ी मुश्किल से पकड़ा गया है। अगर ऐसे में आरोपी को आसानी से छोड़ दिया गया, तो पुलिस अफसर हतोत्साहित हो जाएंगे।
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सरकार ने यह भी तर्क रखा कि पीड़िता का आसाराम की कुटिया तक पहुंचना महज संयोग नहीं था बल्कि यह सोची समझी साजिश थी। अदालत से कहा गया कि आसाराम, शिवा, शिल्पी तथा पीड़िता के परिजनों की कॉल डिटेल से पता चलता है कि चारों एक दूसरे के संपर्क में थे।
पीड़िता की ओर से एफआईआर देरी से व दिल्ली में दर्ज करवाने के पीछे आसाराम के वकीलों के तर्क पर अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि पीड़िता डरी हुई थी।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि पीड़िता की ओर से मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए 164 के बयानों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसके साथ बलात्कार की हद तक दुराचार किया गया। उसे और उसके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी गई। शिवा ने भी कुटिया तक पीड़िता को छोड़ने की बात पुलिस पूछताछ में स्वीकारी है।
इस पर आसाराम के वकील ने कहा कि जब तक शिवा के धारा 164 के बयान नहीं हो जाते, तब तक उसकी ओर से पुलिस को दी गई कोई भी जानकारी अदालत में मान्य नहीं है।