आसाराम केस के अहम गवाह की हत्या
दुष्कर्म मामले में आसाराम के खिलाफ गवाही देने वाले अमृत प्रजापति की मंगलवार को मौत हो गई। उन्हें 23 मई को राजकोट में गोली मारी गई थी। तभी से उनका इलाज अस्पताल में चल रहा था।
अमृत प्रजापति पर आसाराम केस में अहम गवाह थे। उन्होंने आसाराम के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे। जोधपुर में एक सेविका के आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाने के बाद प्रजापति ने आसाराम के खिलाफ गवाही दी थी। उन्होंने आश्रम में होने वाली कई गतिविधियों का खुलासा भी किया था।
आसाराम के खिलाफ गवाही देने के चलते ही अमृत प्रजापति 23 मई को जानलेवा हमला किया गया। ये हमला उस समय हुआ जब प्रजापति राजकोट के पेडक रोड पर स्थित अपने ओमशांति क्लीनिक में बैठे हुए थे। इसी बीच दो युवक वहां पहुंचे फायरिंग करके बाइक से फरार हो गए।
आसाराम केस में अहम गवाह थे
इधर, फायरिंग की घटना के तुरंत बाद प्रजापति को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां मंगलवार सुबह उनकी मौत हो गई। इस मामले में आसाराम के छह चेलों पर हत्या का आरोप है, जिनकी तलाश जारी है। अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
अमृत प्रजापति के बारे बताया जाता है कि वो एक समय आसाराम के आश्रम में वैद्य थे। लगभग 12 सालों तक अहमदाबाद आश्रम में वैद्य रहने के बाद प्रजापति ने आश्रम छोड़ दिया।
आसाराम के खिलाफ दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद अमृत प्रजापति सामने आए। उन्हें इस केस में अहम गवाह माना जा रहा था।
आसाराम पर लगाए थे गंभीर आरोप
अपनी गवाही में उन्होंने आसाराम के खिलाफ कई आरोप लगाए। प्रजापति की गवाही के बदौलत ही आसाराम पर लगे आरोपों में कोर्ट ने छानबीन के आदेश दिए। जिसमें आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं के अनेकों अनैतिक कारनामों का भंडाफोड़ हुआ।
प्रजापति ने आसाराम पर आरोप में कहा कि वो अफीम का सेवन करते थे। इसे वे पंचेड़ बूटी कहते हैं। हालांकि आसाराम के बेटे नारायण साई ने दावा किया कि उनके पिता अफीम का सेवन नहीं करते।
प्रजापति ने कहा था कि आसाराम रतलाम से 17 किलोमीटर दूर पंचेड़ आश्रम में अफीम की खेती करवाते थे। वहीं से अपने लिए अफीम मंगाया करते थे। हालांकि आसाराम समर्थक उनके आरोप को खारिज करते रहे।