आसाराम मामला: कृपाल सिंह की हत्या के बाद दूसरे गवाह की सुरक्षा बढ़ी
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कथावाचक आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली बिटिया को नाबालिग होने का टीसी जारी करने वाले सरस्वती स्कूल के प्रधानाचार्य अरविंद वाजपेयी की जान को भी खतरा है।
उन्होंने भी जोधपुर कोर्ट जाकर आसाराम के हथकंडों के बारे में गवाही दी थी। अब कृपाल सिंह की हत्या के बाद खतरा भांप कर डीआईजी ने उन्हें गनर दिला दिया है। साथ ही बिटिया और प्रधानाचार्य के घर की निगरानी रखने को खुफिया विभाग से कहा गया है।
आसाराम पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली लड़की ने शाहजहांपुर के जिस स्कूल में प्राइमरी शिक्षा ग्रहण की थी, उसी स्कूल से जारी टीसी पीड़िता के अधिवक्ता ने कोर्ट में पेश किया था। बिटिया के नाबालिग होने का सबसे बड़ा आधार यही था।
पीड़िता और कृपाल की पत्नी की भी सुरक्षा बढ़ी
आसाराम के गुर्गों ने प्रधानाचार्य को 50 लाख रुपये का लालच देकर बालिग होने का प्रमाण पत्र मांगा था लेकिन प्रधानाचार्य अडिग रहे। इसके बाद धमकाकर भी बालिग होने का टीसी लेने की कोशिश की गईऱ् थी। इन कोशिशों में प्रधानाचार्य के घर में 31 अक्तूबर 2013 को अखबार में दो जिंदा कारतूस रखकर फेंके गए थे।
ऐसा करके गुर्गे चेतावनी देना चाहते थे। इस मामले का मुकदमा भी लिखा गया था। बाद में जोधपुर पुलिस तक यह बात पहुंची तो पुलिस ने शाहजहांपुर आकर उनके बयान दर्ज किए थे। साथ ही छह से 12 दिसंबर 2014 के बीच कोर्ट में उनके बयान भी कराए गए।
डीआईजी आरकेएस राठौर ने बताया कि सीधे सादे अरविंद अब कृपाल सिंह की हत्या के बाद थोड़ा डर भी गए हैं, इसलिए उन्हें गनर दिला दिया है। पीड़िता के अलावा कृपाल सिंह की पत्नी की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस की टीमें कृपाल सिंह के हत्यारों का पता लगाने के लिए लगी हुई है। उम्मीद है कि जल्द ही कृपाल सिंह के हत्या का खुलासा होगा।