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आसाराम बापू न धर्माचार्य हैं और न ही संत: शंकराचार्य

Tue, 27 Aug 2013 08:38 AM IST
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री Updated Tue, 27 Aug 2013 08:38 AM IST
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asaram bapu is not saint says jagadguru shankaracharya swami swaroopanand saraswati

नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में फंसे आसाराम बापू को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती संत या धर्माचार्य नहीं मानते।

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शंकराचार्य का कहना है कि आसाराम बापू न संत हैं और न ही धर्माचार्य हैं, वह सिर्फ एक गृहस्थ कथा वाचक हैं जो प्रवचन करते हैं।

उन पर लगे आरोपों पर कोई टिप्पणी किए बिना शंकराचार्य ने कहा कि समाज को संत और सामान्य गृहस्थ में फर्क करना चाहिए।

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दिल्ली में चातुर्मास कर रहे शारदा पीठ द्वारिका और ज्योर्तिपीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि संत या धर्माचार्य बनने केलिए किसी गुरु से दीक्षा लेनी पड़ती है, संन्यास लेना होता है, लेकिन आसाराम बापू ने किसी गुरु से दीक्षा नहीं ली और न ही उन्होंने संन्यास लिया है।
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कथा वाचन और प्रवचन उनका व्यवसाय है। इसी तरह सिर्फ गेरुआ वस्त्र पहनने से भी कोई संत या धर्माचार्य नहीं हो जाता।

शंकराचार्य ने कहा कि पिछले कुछ समय से ऐसे लोग जो संत का चोला धारण करके समाज में अपने कृत्यों के कारण बदनाम हो रहे हैं, उनसे संत समाज की प्रतिष्ठा गिरी है।
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यह पूछने पर कि क्या आसाराम बापू के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, शंकराचार्य ने कहा कि यह जांच करना पुलिस का काम है कि कौन दोषी है और कौन नहीं। लेकिन जो भी दोषी पाया जाए उसपर कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि संतों के दर्शन करने जब लोग जाते हैं तो उनमें वह गुरु और ईश्वर के दर्शन करते हैं। ऐसे में अगर कोई अनुचित कार्य करता है तो उससे समाज में गलत संदेश जाता है। इसलिए धर्माचार्यों और संतों शास्त्रीय मर्यादा का पालन करते हुए समाज का मार्ग दर्शन करना चाहिए।

शंकराचार्य ने कहा कि पाखंडियों और संतों में भेद करना होगा।

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