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आसाराम ने मांगी माफी, लखनऊ, कानपुर में मुकदमा

Wed, 09 Jan 2013 09:24 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 09 Jan 2013 09:24 AM IST
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asaram apologized, case registerd against him in lucknow and kanpur

दिल्ली गैंगरेप घटना के बारे में अपने विवादित बयान से चर्चा में आए अध्यात्मिक गुरु आसाराम बापू ने आज कहा कि उन्होंने पीड़ित के बारे में कोई असंवेदनशील टिप्पणी नहीं की थी। साथ ही उन्होंने यह भी कह डाला कि यदि उनसे गलती हुई है तो वह माफी मांगते हैं।

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आसाराम ने कथित रूप से टिप्पणी की थी कि अगर युवती दुष्कर्म करने वालों को अपना भाई कहती, उनके पैर पकड़ती तो वे उसे छोड़ देते। उन्होंने घटना के लिए दोनों पक्षों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि पीड़िता भी दुष्कर्म के आरोपियों के जितना ही दोषी है।
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इस बयान के बाद मीडिया में आसाराम का यह बयान खूब उछला और राजनीतिक दलों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसकी भर्त्सना की।

समाचार चैनल टाइम्स नाउ से आज एक बातचीत में आसाराम अपने पहले के बयान से पलटते हुए कहा कि उनके बयान को गलत अर्थों में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि मैंने लड़की के बारे में काफी सहानुभूतिपूर्वक बातें कीं। मैं इतना क्रूर कैसे हो सकता हूं कि उसे जिम्मेदार ठहराऊं।  
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आलोचकों और मीडिया को कुत्ता कहने के मुद्दे पर आसाराम ने कहा कि उन्होंने तो सांप से भी प्रेम किया है, ऐसे में वह मीडिया के बारे कैसे गलत कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि मैं यह कभी नहीं कह सकता कि मीडिया भौंकता है।

गौरतलब है कि बाद की खबरों में आसाराम के हवाले से कहा गया था कि उन्होंने अपने आलोचकों खास तौर पर मीडिया को भौंकने वाला कुत्ता कहा था।

इस बीच दिल्ली गैंग रेप काण्ड में आसाराम बापू द्वारा आपत्तिजनक बयान के खिलाफ लखनऊ के मुख्य न्यायिक मैजिस्ट्रेट कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की गई।

शहर के एक सामाजिक कार्यकर्ता देवेश कुमार शुक्ल ने अर्जी दी, आसाराम बापू के खिलाफ अपराधिक मामला दर्ज करने की अपील की गई है।

वहीं कानपुर में इसी मुद्दे पर आसाराम के खिलाफ एक व्यापारी नेता की तरफ से तीन अधिवक्ताओं ने परिवाद दाखिल किया है। व्यापारी नेता ज्ञानेश मिश्र ने आसाराम बापू खिलाफ स्पेशल सीजेएम कोर्ट में अर्जी दी है।

इसमें कहा गया है कि आसाराम बापू का बयान तकलीफदेह है। आशाराम बापू ने स्त्री समुदाय और पुरुष समुदाय में मतभेद कराके उनके विरुद्ध षडयंत्र रचकर आपसी वैचारिक मतभेद बढ़ाने के लिए इस तरह के बयान दिए हैं। इसलिए आरोपी को तलब कर दंडित किया जाए।


वकीलों ने बताया कि अदालत में धारा 153 ए के तहत कार्रवाई करने की अर्जी दी गई थी। इसे दर्ज कर लिया गया है। गौरतलब है कि धारा 153 ए में वर्गों के बीच शत्रुता फैलाने के आरोप में तीन साल की सजा या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यह अपराध गैर जमानती है।

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