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अमेरिका में फिर बजा भारतीय प्रतिभा का डंका

Fri, 31 May 2013 08:34 PM IST
नई दिल्ली/वाशिंगटन/एजेंसी
नई दिल्ली/वाशिंगटन/एजेंसी Updated Fri, 31 May 2013 08:34 PM IST
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arvind mahankali wins spelling bee

अमेरिका में एक बार फिर भारत प्रतिभा का डंका बजा है।

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13 वर्षीय अरविंद महाकाली ने अमेरिका में हुई राष्ट्रीय स्तर की ‘स्क्रिप्स स्पेलिंग बी’ प्रतियोगिता जीतकर भारतीय मूल के लाखों लोगों को एक बार फिर मुस्कुराने का बेहतरीन मौका दिया है।

अरविंद मूल रूप से हैदराबाद के रहने वाले आईटी कंसल्टेंट पिता और डाक्टर मां के बेटे हैं। प्रतियोगिता का दूसरा और तीसरा भी भारतीयों ने जीता।

13 वर्षीय प्रणव शिवकुमार को दूसरा और श्रीराम हथवार को तीसरा स्थान मिला। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में आठ देशों के 281 बच्चों ने हिस्सा लिया। फाइनल में आठ बच्चों ने जगह बनाई।
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प्रतियोगिता में छात्रों की दिमागी शक्ति, कंप्यूटर और शब्द ज्ञान की परख की गई। अरविंद साल 2008 के बाद यह प्रतियोगिता जीतने वाले पहले लड़के हैं।

इस बीच लड़कियों ने ही इसमें बाजी मारी थी। पुरस्कार में उन्हें 30,000 डॉलर की नकद राशि और एक बड़ी ट्राफी प्रदान की गई।

आठवीं में पढ़ने वाले अरविंद के गणित और विज्ञान पसंदीदा विषय हैं। वह आगे चलकर भौतिक विज्ञानी बनना चाहते हैं।

वह तेलगू और स्पेनिश बोलते हैं तथा टेनिस बास्केटबाल उनके पसंदीदा खेल हैं। प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में पहुंचे 42 बच्चों में 15 भारतीय मूल के थे।

सिर्फ अरविंद ही नहीं फेहरिस्त में
पूरे अमेरिका में काफी मशहूर इस प्रतियोगिता में लगातार छठे साल भारतीय मूल के बच्चे ने बाजी मारी है। इससे पहले समीर मिश्रा (2008), काव्या शिवशंकर (2009), अनामिका वीरामणी (2010), सुकन्या रॉय (2011) और स्ग्धि नांदीपति (2012) यह प्रतियोगिता जीतने में सफल हो चुके हैं।
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वरदान साबित हुई मुसीबत
फाइल में अरविंद से जर्मन शब्द ‘केनाइडल’ का मतलब पूछा गया था, जिसे उन्होंने बिना देरी के बता दिया। इससे पहले लगातार तीन सालों से वह जर्मन शब्दों में ही अटक जाने के चलते यह प्रतियोगिता जीतने से महरूम रह चुके हैं।


जीत के बाद अरविंद ने कहा कि जर्मन शब्द पहले मेरे लिए मुसीबत खड़ी करते थे, लेकिन इस बार वही वरदान साबित हुए। वह 2010 में नवें और 2011 तथा 12 में तीसरे नंबर पर रह गए थे।

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