{"_id":"5be7fb3ba947fe9b884490efd9b3d46d","slug":"arvind-kejriwal-win-heart-of-voters-in-delhi-election","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा ने मुकाबला जीता, केजरीवाल ने दिल","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
भाजपा ने मुकाबला जीता, केजरीवाल ने दिल
संजय अभिज्ञान/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 09 Dec 2013 08:07 AM IST
विज्ञापन
खासे अलग मगर बेहद विवादित तेवरों के साथ राजनीति में कदम रखने वाले अरविंद केजरीवाल ने देश की राजधानी दिल्ली में ऐसी धमक पैदा की है कि क्या तो विरोधी और क्या समर्थक, सब उनके गुन गा रहे हैं।
विज्ञापन
हाव-भाव और बोलचाल में कतई आम आदमी लगने वाले इस शख्स ने अपने पहले चुनाव में ही पार्टी को 28 सीटें दिलवा कर ऐसा करिश्मा कर दिखाया है कि सियासी पंडित इसे दिल्ली ही नहीं, राष्ट्र की राजनीति के लिए भी ऐतिहासिक बता रहे हैं।
विज्ञापन
अरविंद केजरीवाल ने सिर्फ कांग्रेस को ही धूल नहीं चटाई है। उन्होंने बीजेपी की 4-0 वाली उस थ्योरी पर भी सवालिया निशान लगाया है, जिसे नरेंद्र मोदी की आंधी के पैरोकार पेश कर रहे थे।
विज्ञापन
उन्होंने उन एग्जिट पोल और सटोरियों को भी धता बता दिया है, जिन्होंने आप को छह सीट से लेकर 18 के दायरे में समेट दिया था। उन्होंने तीन बार की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को उन्हीं के गढ़ में जाकर चुनौती दी और 25,864 वोटों से हरा भी दिया।
वे किसी लहर पर चढ़कर 28 के आंकड़े तक नहीं पहुंचे। उन्होंने हिम्मती स्टिंग किए, वीआईपी हस्तियों के घर-दफ्तरों का घेराव किया, गैंगरेप या बिजली के बिल जैसे मुद्दों पर सड़क पर उतरकर आंदोलन किए। अन्ना की आंधी में उनके सबसे बड़े सिपहसालार रहे।
बीस करोड़ का फंड एकत्र होने के बाद और चंदा लेने से इनकार तक कर दिया। दाग लगने पर राजौरी गार्डन के एक उम्मीदवार का नाम वापस लेकर एक दूसरी मिसाल बनाई।
बहरहाल, जिस पार्टी को लोग चार सीटों की पार्टी बताकर खारिज कर रहे थे, अरविंद उसे 28 सीटें जितवा कर मैदान में खड़े हैं और कम से कम इतना आश्वासन जरूर दे रहे हैं कि अगर किसी चमत्कार से भाजपा की सरकार बन भी जाती है तो वह विपक्ष में बैठकर नाकों चने चबवा देंगे।