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'अरविंद जीते तो विजेता, हारे तो शहीद'

Mon, 03 Jun 2013 12:52 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 03 Jun 2013 12:52 PM IST
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arvind kejriwal to contest against sheila dikshit in delhi polls

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से ताल ठोककर मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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माना जा रहा है कि अब इस विधानसभा में मुख्यमंत्री की जीत की राह आसान नहीं होगी।

ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में राज्य सरकार के कर्मचारियों की संख्या काफी कम है।

यहां केंद्र सरकार के कर्मचारी निर्णायक भूमिका में हैं। इतना ही नहीं यहां कांग्रेस का एक धड़ा मुख्यमंत्री का विरोध करता रहा है। वहीं, भाजपा भी इन दिनों दो गुटों में बंट गई है। दोनों पार्टियों को गुटबाजी का नुकसान हो सकता है।
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आत्मघाती हो सकता है निर्णय

माना जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल का यह निर्णय आत्मघाती भी साबित हो सकता है। विश्लेषकों की राय है कि

केजरीवाल के इस कदम से कांग्रेस का फायदा होगा। नई दिल्ली इलाके में कांग्रेस विरोधी वोट बंटेंगे और शीला जीतने में कामयाब रहेंगी।

हालांकि आम आदमी पार्टी में अरविंद के इस निर्णय से जश्न है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदालन के कारण राजधानी में अरविंद केजरीवाल की लोकप्रियता बढ़ी है, लिहाजा वो मुख्यमंत्री को कड़ी टक्कर देने की स्थिति में हैं।
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चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं। इस तबके ने अन्ना के आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। संभावना है कि इस तबके में पैठ बनाने में अरविंद कामयाब रहेंगे।

अरविंद का निर्णय राजनीतिक रूप से उचित है या नहीं यह कहना मुश्किल है लेकिन राजनीतिक विश्लेषक आनंद प्रधान के आंकलन पर यकीन करें तो, अगर अरविंद जीतते हैं तो वे विजेता साबित होंगे और हारते हैं तो शहीद।

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