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दिवाली से पहले केजरीवाल ने फोड़ा 6000 करोड़ का बम
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 10 Nov 2012 01:35 AM IST
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अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि एचएसबीसी बैंक की जेनेवा शाखा में 700 भारतीयों का 6000 करोड़ रुपये का काला धन जमा है। इसमें देश के नामचीन उद्योगपतियों के नाम भी शामिल हैं। केंद्र सरकार इसकी छानबीन करने की जगह उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार देश की आर्थिक संप्रभुता के लिए खतरा बन गई है।
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केजरीवाल ने बताया कि फ्रांस की सरकार ने भारत सरकार को गत वर्ष जुलाई में एक सीडी दी थी। इसमें 700 ऐसे भारतीयों के नाम थे, जिनके एचएसबीसी बैंक की जेनेवा शाखा में खाते थे। लिस्ट से इन खातों में वर्ष 2006 में जमा पैसे की जानकारी मिली थी। इन सात सौ लोगों में मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, नरेश गोयल, यशोवर्धन बिड़ला, बर्मन परिवार के साथ सांसद अनु टंडन के नाम भी शामिल हैं। उन्नाव की सांसद अनु टंडन को राहुल गांधी की कोर कमेटी का सदस्य बताया जा रहा है।
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केजरीवाल ने कहा कि किसी बड़ी शख्सियत के यहां छापेमारी की जगह आयकर विभाग ने छोटे लोगों पर शिकंजा कसा। उन्होंने यह भी कहा कि अपने नाम की सूचना मिलते ही मुकेश अंबानी ने तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और टैक्स के पैसे चुकाकर छापेमारी रुकवा ली।
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तत्कालीन वित्त मंत्री के बारे में केजरीवाल ने कहा कि प्रणब मुखर्जी इन्हीं 700 लोगों की मदद करने के लिए स्वैच्छिक संपत्ति घोषणा योजना लाना चाहते थे, लेकिन इसे रोक कर उन्होंने आयकर चुकाकर माफी पाने का दूसरा रास्ता निकाल लिया।
केजरीवाल के मुताबिक, आयकर विभाग के अधिकारियों को दिए गए तीन व्यक्तियों के बयान से साफ है कि एचएसबीसी भारत में खुलेआम हवाला कारोबार कर रहा है, जबकि फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा) और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट के तहत ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है।
अक्टूबर, 2011 की डायरेक्टर ऑफ इंवेस्टीगेशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए केजरीवाल ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने एचएसबीसी दुबई और जेनेवा को भारत में बैंकिंग कारोबार की इजाजत नहीं दी है। लिहाजा पूरा बैंकिंग ऑपरेशन गैर-कानूनी है।
सीबीआई के मौजूदा डायरेक्टर के बयान के आधार पर केजरीवाल ने बताया कि देश का 25 लाख करोड़ रुपये का कालाधन स्विस बैंकों में जमा है। उन्होंने यह भी कहा कि एचएसबीसी बैंक देश में आतंकवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है।
सरकार ने बैंक की गतिविधियों की जांच करने की जगह इसे क्लीन चिट दे दी। अगर सरकार चाहे तो बैंक एक दिन में बंद हो सकता है, लेकिन वह ऐसा करेगी नहीं, क्योंकि सरकार में शामिल लोगों का पैसा बैंक में जमा है। केजरीवाल ने कहा कि सरकार संसद को भी गुमराह कर रही है। एक जवाब में उसने 6000 करोड़ की जगह 565 करोड़ होने की ही जानकारी दी।
आईएसी के सवाल
-नामचीन लोगों के यहां आयकर विभाग ने छापेमारी क्यों नहीं की, उनके बयान क्यों नहीं लिए गए।
-किस तरह स्विस बैंकों में रकम जमा कराई गई।
-इन खातों से लेन-देन कैसे हो रहा है, क्या लेन-देन हवाला कारोबार के जरिए हो रहा है।
-क्या अंबानी बंधु, नरेश गोयल, बर्मन परिवार और बिड़ला परिवार हवाला गतिविधियों में शामिल हैं।
-इन बैंक खातों से कैसा लेन-देन हुआ, क्या नेताओं या नौकरशाहों को कोई घूस दी गई।
आईएसी की मांग
-देश में एचएसबीसी का कारोबार तुरंत रोका जाए।
-एचएसबीसी के शीर्ष अधिकारियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉंड्रिंग एक्ट के तहत गिरफ्तार किया जाए। इन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो।
-अमेरिका की तरह यहां भी एचएसबीसी को बाध्य किया जाए कि सभी भारतीयों के जेनेवा शाखा के खातों की जानकारी दे।
-लिस्ट में शामिल सभी 700 लोगों के यहां छापेमारी कर बयान दर्ज कराए जाएं।
-उन्हें अपने सारे खातों की पूरी जानकारी देने को कहा जाए।
-अगर ये लोग हवाला लेन-देन में शामिल पाए जाएं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
तीन लोगों का बयान बना हवाला का आधार
-गाजियाबाद के विक्रम धीरानी ने आयकर विभाग को बताया था कि संपर्क करने पर बैंक की दुबई शाखा में खाता खोलने के लिए प्रतिनिधि दिल्ली में आकर मिले। सारी औपचारिकताएं दिल्ली में पूरी हुईं। इसके लिए उन्हें दुबई नहीं जाना पड़ा। रकम जमा कराने के लिए प्रतिनिधि उनके घर आते थे। यह रकम दुबई शाखा में जमा हो जाती थी। रकम जमा होने की सूचना जुबानी तौर पर बैंक से मिल जाती थी, जबकि बैंक प्रतिनिधियों की जानकारी उन्हें नहीं मिल पाती थी।
-दिल्ली निवासी प्रवीण साहनी ने जानकारी दी थी कि एचएसबीसी शाखा से जब कभी उन्हें रकम निकालनी होती थी तो बैंक के अधिकारी को फोन करते थे। बैंक अपने एजेंट के जरिए रकम उन्हें दिल्ली में ही मुहैया करा देता था। पूरी बैंकिंग फोन पर हो जाती थी। प्रवीण ने अधिकारियों को जेनेवा शाखा के संपर्क सूत्र की जानकारी दी, लेकिन दिल्ली के एजेंट के बारे में उसे पता नहीं है।
-दिल्ली के परमिंदर सिंह ने बताया कि खाता खोलने के बाद उसने ज्यूरिख के खाते में रकम जमा कराने के लिए भारत में किसी व्यक्ति को रकम दी। ऐसा करने के लिए चार्ल्स नामक एक व्यक्ति ने कहा था। रकम कई किश्तों में दी गई।
लिस्ट में शामिल दस नाम
मुकेश धीरूभाई अंबानी- 100 करोड़
अनिल धीरूभाई अंबानी- 100 करोड़
मोटेक सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड (रिलायंस ग्रुप की कंपनी)-2100 करोड़
रिलायंस इडस्ट्रीज लिमिटेड-500 करोड़
संदीप टंडन-125 करोड़
अनु टंडन-125 करोड़
नरेश कुमार गोयल-80 करोड़
वर्मन परिवार-25 करोड़
यशोवर्धन बिड़ला-कोई पैसा नहीं
कोकिला धीरूभाई अंबानी-कोई पैसा नहीं
कांग्रेस के बड़े नेता ने दिया सूत्र
अरविंद केजरीवाल ने मीडिया को बताया कि बड़ी संजीदगी से पड़ताल के बाद ही उन्होंने ये आरोप लगाए हैं। इसकी शुरुआत कांग्रेस के एक बड़े नेता से मिले संदेश से हुई थी। उन्होंने इसकी थोड़ी जानकारी दी। इसके बाद हम लोगों ने अपने स्रोतों से जब जांच कराई तो एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इसके बाद ही इसे पब्लिक डोमेन में डाला जा रहा है। हालांकि केजरीवाल ने उक्त नेता के नाम की जानकारी नहीं दी।
एचएसबीसी के माफी मांगने पर उठाया सवाल
गत वर्ष एचएसबीसी द्वारा इस संबंध में मुकेश अंबानी से माफी मांगने के बाद मामला बंद होने के सवाल पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आरोपी दोनों हैं। एक दूसरे से माफी मांग रहा है और सरकार इसके आधार पर बगैर जांच किए मामले को रफा-दफा बता रही है। क्या मतलब है इसका? केजरीवाल ने कहा कि एक बार नाम सामने आने के बाद जांच के बिना कैसे कहा जा सकता है कि कोई आरोपमुक्त है।