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अरविंद केजरीवाल के कानून मंत्री ऐसे करते हैं काम

Thu, 30 Jan 2014 03:51 PM IST
Updated Thu, 30 Jan 2014 03:51 PM IST
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Arvind Kejriwal's Law Minister that such work

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाक़े में एक धुंध भरी, कड़कड़ाती सुबह के साढ़े छह बजे मैं दूसरी मंज़िल के एक घर का दरवाज़ा खटखटाता हूँ। दरवाज़ा खोलने वाले हैं ख़ुद दिल्ली के क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती।

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लेकिन इस घर के बाहर वो सब तामझाम नहीं है जो आम तौर पर मंत्रियों के घरों में नज़र आता है। न कोई सुरक्षा गार्ड और न बंदूक़ें सँभाले पुलिस वाले। सड़क पर खड़ी दिल्ली सरकार की इनोवा कार से मुझे अहसास हुआ कि मैं सही पते पर पहुँचा हूँ।
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दिल्ली आईआईटी से एमएससी के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से क़ानून की डिग्री लेने वाले सोमनाथ भारती इस दफ़्तरनुमा घर में अपनी माँ के साथ रहते हैं। अभी एक महीना पहले तक वह सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट के वकील थे, पर उन्होंने आम आदमी पार्टी के सदस्य के तौर पर मालवीय नगर से काँग्रेस की किरण वालिया को चुनाव में हराया और उन्हें राज्य का क़ानून मंत्री बनाया गया।
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चंद दिनों बाद ही वह स्थानीय लोगों की शिकायत पर रात को अपने समर्थकों के साथ खिड़की गाँव पहुँच गए और वहाँ तैनात पुलिस वालों को कथित वेश्यावृत्ति और नशीली दवाओं के व्यापार को रोकने का आदेश दिया। इसके बाद खड़ा हुआ विवाद दिल्ली ही नहीं पूरे देश ने देखा।

विवादों में सोमनाथ भारती

Arvind Kejriwal's Law Minister that such work
  • दिल्ली का क़ानून मंत्री बनते ही हाईकोर्ट के जजों की बैठक तलब की जबकि वे उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे।
  • 16 जनवरी की रात को आधी रात के बाद पुलिस पर अफ़्रीकी मूल के लोगों पर कार्रवाई करने के लिए दबाव बनाया।
  • दिल्ली महिला आयोग के नोटिस के बावजूद महिला आयोग के समक्ष पेश नहीं हुए
  • विपक्षी पार्टी के नेताओं के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया
  • मीडिया पर पैसे लेने का आरोप लगाया, बाद में माफ़ी माँगी
कुछ समय बाद भारती लौटे तो उनके टैब की घंटी बजी। उन्होंने स्पीकर मोड पर फ़ोन उठाया। कोई महिला कथित अफ़्रीकी महिलाओं के वेश्यावृत्ति में लिप्त होने के बारे में किसी अफ़्रीकी देश के दूतावास में आई शिकायतों के बारे में जानकारी दे रही थी।

सात बजे भारती ने अपने साथ जुड़े आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को जगाया और मॉर्निंग वॉक के लिए हौज़ ख़ास के पार्क के लिए रवाना हुए। "आप सही लड़ रहे हैं लेकिन ये जो सिस्टम है ये बहुत मुश्किल बना हुआ है। ये हमारे ख़ून में बस गया है। बहुत वक़्त लगेगा बदलने में।"

"बहुत ज़ोर लगाना पड़ेगा आपको, ये बात सही है कि थाने बिकते हैं। अच्छे अधिकारी को काम की पोस्टिंग नहीं मिलती और घूस देने वाले को अधिकारी बना देते हैं।" ये उन बुज़ुर्गों के शब्द हैं जो हौज़ ख़ास के डिस्ट्रिक्ट पार्क में सोमनाथ भारती को सबसे पहले मिले थे।

सोमनाथ भारती हर सुबह अपने विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग पार्क में टहलने जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद जनता के संपर्क में रहने का उन्होंने यही तरीक़ा अपनाया है।

पार्क में टहलते मंत्री को देखते ही लोग दूर से क़रीब आने लगते हैं। मंत्री जी के सामने ज़्यादातर लोग उनकी कार्यशैली की तारीफ़ ही कर रहे थे।

'बस मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया'

Arvind Kejriwal's Law Minister that such work
एक बुज़ुर्ग हाल-चाल पूछते हैं, "जिन विवादों में आप फँसे हैं उनसे निकल गए या नहीं।" सोमनाथ जबाव देते हैं, "बस मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है।" बुज़ुर्ग दिलासा देते हैं, "ये सब ग़लत हो रहा है। कोई कुछ करना चाह रहा है उसे करने नहीं दिया जा रहा और इसका सब पर असर हो रहा है।"

पार्क में एक कश्मीरी महिला ने सोमनाथ को सलाह देते हुए कहा, "जिसका गुम हो जाता है वो खोजने निकलता है, जो पा लेता है सब उसके ख़िलाफ़ हो जाते हैं। इनकी कुर्सी गुम हो गई है, ये सब 'आप' के पीछे लगे हैं।"

एक और बुज़ुर्ग की सलाह थी, "अपनी ऊर्जा लोकसभा चुनाव में बर्बाद मत कीजिए। जो वादे आपने दिल्ली में किए हैं पहले उन्हें पूरा करके दिखाइए। आपके साथ जनसमर्थन है लेकिन लालची मत बनिए।"

भारती ने कहा, हम हिंदू राष्ट्र नहीं, ह्यूमन राष्ट्र की बात करते हैं। ऐसी व्यवस्था की बात करते हैं जहाँ जनता मालिक हो और मंत्री नौकर।"

क्या बाक़ी दल आम आदमी पार्टी की नक़ल कर रहे हैं? इस सवाल पर भारती कहते हैं, "नक़ल करने से अगर जनता का भला होता है तो अच्छी बात है। लेकिन बदलाव के लिए आत्मा से आवाज़ आनी ज़रूरी है।"

'मौत का दिन निश्चित है'

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जान को ख़तरे के सवाल पर सोमनाथ कहते हैं, "हर किसी की मौत का दिन निश्चित है। जब आनी है तब आएगी। हमें मौत की चिंता नहीं बल्कि इस बात की चिंता है कि जब हम ज़िंदा थे तो क्या कर रहे थे। ज़िंदा होकर ज़िंदा थे या नहीं।"

मैं सोमनाथ से सवाल करते हुए आगे बढ़ ही रहा था कि एक व्यक्ति ने पास आकर कहा कि अख़बार बता रहे हैं कि क़ानून मंत्री पर मामला दर्ज हुआ है।

भारती ने जबाव दिया, "सेक्स और ड्रग ट्रेड इतना गहरा और जटिल है। हथियारों की डील में लड़कियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वे मेरा ख़ून चाहते हैं। लेकिन मेरे इलाक़े की जनता मेरे साथ है इसलिए कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। किसी हेडलाइन से मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।"

हम उनकी गाड़ी से सचिवालय के लिए निकल पड़े। रास्ते में मेट्रो स्टेशन पर उतरकर भारती ने गाड़ी को सचिवालय भेज दिया और आगे का सफ़र मेट्रो से किया। मैंने सवाल किया जब गाड़ी फ़ाइलें लेकर सचिवालय जानी ही हैं तो आप ये मेट्रो से जाने का दिखावा क्यों कर रहे हैं?

उनका जबाव था, "भले ही यह लोगों को प्रतीकात्मक लगे लेकिन इससे भी हमें जनता से जुड़ने का मौक़ा मिलता है। हमारा मूल काम जनता के लिए सहज उपलब्ध होना और लोगों में यह भावना पैदा करना है कि हम उनकी पहुँच में हैं। हफ़्ते-पंद्रह दिन में एक बार मेट्रो में सफ़र करके हम यही संकेत देते हैं। लोगों को भी अच्छा लगता है कि सरकार का मंत्री हमारे बग़ल में खड़ा होकर सफ़र कर रहा है।"

मेट्रो में कानून मंत्री

Arvind Kejriwal's Law Minister that such work

राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर एक व्यक्ति ने शिकायती लहजे में कहा, "लोगों की परेशानियाँ भी देखिए, आपके धरने के कारण हम वक़्त पर दफ़्तर नहीं पहुँच पाए।" सोमनाथ ने हँसकर कहा, "जी ये सब आपके लिए ही किया जा रहा है।"

इंद्रप्रस्थ मेट्रो स्टेशन से सचिवालय जाने के लिए ऑटो वाले ने मना कर दिया। गुज़ारिश करने पर बैठा तो लिया लेकिन सचिवालय के बजाए आईटीओ मोड़ पर लगी बेरीकैडिंग पर ही छोड़ दिया। सचिवालय पहुँचते ही सोमनाथ पार्टी की बैठक में चले गए और मैं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की निजी सहायक के कक्ष में बैठ गया। अन्ना आंदोलन के स्वयंसेवक दफ़्तर का कार्यभार संभाले नज़र आए।

दिल्ली पुलिस को लेकर हुए अरविंद केजरीवाल के धरने के बाद बीते दस दिनों में भी सोमनाथ भारती ने अपने नाम के साथ कुछ और विवाद जोड़ लिए हैं। विपक्षी नेताओं के लिए अमर्यादित शब्दों के इस्तेमाल के साथ-साथ उन्होंने मीडिया पर भी सवाल किए हैं। हालाँकि इसके लिए वे माफ़ी भी माँग चुके हैं।

आम आदमी पार्टी की सरकार को अभी एक महीने का ही वक़्त हुआ है। सरकार को कामयाब या नाकामयाब कहने के लिए यह बहुत कम समय है लेकिन इस दौरान पार्टी ने सबसे ज़्यादा ज़ोर जनता के बीच रहने पर ही दिया है।

क्या कहते हैं विश्लेषक?

Arvind Kejriwal's Law Minister that such work

अपूर्वानंद, राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक आज की राजनीति की सबसे बड़ी कमी यह है कि नेताओं का जनता से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। अब नेताओं और जनता के बीच सिर्फ़ आश्रयदाता और ग्राहक का रिश्ता रह गया है।

लोग नेताओं के पास सिर्फ़ फ़ायदा लेने पहुँचते हैं। आम तौर पर नेता भी यही रिश्ता बनाकर रखते हैं। लोग मंत्रियों के सामने अपनी अर्ज़िया लेकर आते हैं और मंत्री उनका काम कर देते हैं।

मेरी नज़र में जनता और नेताओं के बीच इस प्रकार के संबंध सही नहीं हैं। जनता के साथ बड़े मुद्दों पर बातचीत भी ज़रूरी है। इसके लिए पहली शर्त लोगों से मिलना-जुलना और सीधा संवाद है।

यदि आम आदमी पार्टी के लोग ऐसा कर रहे हैं तो यह बहुत अच्छा है। अगर यह प्रतीकवाद भी है तो इससे कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। लेकिन यह उस तरह नहीं होना चाहिए जिस तरह पुराने बादशाह लोगों के बीच जाते थे और हालचाल लेते थे। उसमें संवाद नहीं होता था।

आम आदमी पार्टी के नेताओं को अपने जनसंपर्क में यदि सीधा संवाद करने का मौक़ा मिलता है तो कुल मिलाकर मैं ऐसा समझता हूँ कि यह तरीका अच्छा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या आम आदमी पार्टी बड़े मुद्दों पर लोगों से संवाद कर पाएगी या नहीं।

क्या कहते हैं विरोधी दल?

Arvind Kejriwal's Law Minister that such work

डॉ हर्षवर्धन ने कहा ‌कि इनके आचरण का ईमानदारी और गंभीरता से विश्लेषण किया जाए तो बस यही कहा जाएगा कि जिस तरह से हाथी के दाँत खाने के और होते हैं और दिखाने के और होते हैं ये भी ठीक वैसे ही हैं।

आम आदमी की सरकार के सभी मंत्री स्वयं सबसे पहले ख़ास आदमी बन गए हैं। जनता के बीच में जाना, मेट्रो से चलना प्रतीकवाद के सिवाय कुछ नहीं है। मेट्रो से चलना असाधारण बात नहीं है। मैं पिछले दस सालों से मेट्रो से चल रहा है।

हमारे गोवा के मुख्यंत्री तो कई सालों से स्कूटर पर चल रहे हैं. यदि कोई नेता इस तरह से चलता भी है तो उसके प्रचार प्रसार की क्या ज़रूरत है। कहीं दौरे पर जाने से पहले ये मंत्री मीडिया को जानकारी देते हैं। ग़रीब आदमी की सेवा से ज़्यादा मंत्रियों का ध्यान मीडिया पब्लिसिटी पर है।

जब ये ठंड से मरते हुए लोगों के पास मीडिया लेकर पहुँचते हैं तो कहते हैं तीन दिनों में पोर्टा केबिन बना देंगे लेकिन एक महीने बाद भी एक भी केबिन नहीं बना पाते। इनकी सादगी और सुचिता ढोंग और पाखंड के सिवाय कुछ नहीं है।

पार्कों में जाकर जनसंपर्क करना कोई नई बात नहीं है. सभी विधायक अपने इलाक़ों में घूमते हैं। दिल्ली में बाढ़ आई थी तब मैं मंत्री था. मैं सप्ताह भर घर नहीं गया था. ये जो कर रहे हैं यह कोई विशेष बात नहीं है। ये सिर्फ अपना प्रचार-प्रसार कर रहे हैं और मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. 'आप' के मंत्री तो नियम, क़ायदों और मर्यादाओं को तोड़ने तक के काम कर रहे हैं।

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