केजरीवाल का 48 घंटे का पावर प्ले
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क्या अरविंद केजरीवाल की 48 घंटे वाली सरकार नायक की स्टाइल में बड़े फैसले ले रही है। कुर्सी संभालने वाले दिन वीआईपी कल्चर हटाने के लिए लालबत्ती व सुरक्षा बंदिश, तीसरे दिन फ्री पानी, एनसीआर को ऑटो रिक्शा तो चौथे दिन बिजली दरें आधी करके केजरीवाल नायक की भूमिका में धमाल मचाना चाहते हैं। केजरीवाल खुद तर्क दे रहे हैं, पता नहीं जो खिचड़ी भाजपा और कांग्रेस में पक रही है उसमें सरकार कितने दिन चलेगी।
आम आदमी पार्टी ने अल्पमत की सरकार बनाई है। कैबिनेट ने एक से 7 जनवरी तक विधानसभा सत्र बुलाने का जो पहला फैसला किया, उस पर भी विवाद सामने आया है। फैसला किया कि एक जनवरी को शपथ और दो जनवरी को विश्वास मत हासिल करेंगे।
केजरीवाल तोड़ रहे हैं नियम और परंपरा
नियम और परंपरा है कि पहले अध्यक्ष का चुनाव होता है फिर विश्वास मत नया अध्यक्ष कराता है। यहां प्रोटेम स्पीकर कराएंगे। इस पर विपक्ष के विधायक साहब सिंह चौहान कहते हैं कि केजरीवाल नियम और परंपरा तोड़ रहे हैं। अध्यक्ष का चुनाव होने की नौबत दिख रही है, जबकि अभी तक आपसी सहमति से फैसला होता रहा है।
अरविंद केजरीवाल के फैसलों ने कांग्रेस की 15 साल वाली सरकार और विपक्ष में बैठी भाजपा को धराशायी कर दिया है। ऐसे में कम से कम लोकसभा चुनाव तक सरकार की कुर्सी थामने की इच्छा रखने वाली कांग्रेस भी उलझन में है। भाजपा पटखनी देना चाहती है।
सूत्र यह भी बता रहे हैं कि कांग्रेस न सिर्फ बहुमत में साथ देगी, बल्कि अध्यक्ष पद के लिए भी उसी पाले में बैठेगी। जबकि भाजपा उपाध्यक्ष की कुर्सी के लिए आप के अध्यक्ष पद प्रत्याशी एमएस धीर के नाम पर सहमति व्यक्त कर सकती है।
एमएस धीर होंगे आप के अध्यक्ष पद प्रत्याशी
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि आम आदमी पार्टी अध्यक्ष पद के लिए जंगपुरा से विधायक एमएस धीर को प्रत्याशी बनाएगी। भाजपा या कांग्रेस मसले पर क्या करेगी, नहीं कह सकते।
इस बीच भाजपा विधायकों का कहना है कि केजरीवाल को राजनीति सिखाना चाहते हैं, इसलिए प्रोटेम स्पीकर का पद ठुकराया है। अब विधानसभा अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की तैयारी है।
हालांकि जगदीश मुखी, साहब सिंह चौहान और रामवीर सिंह बिधूड़ी में से उम्मीदवार कौन होगा, अंतिम फैसला बुधवार को विधायक दल की बैठक में होगा।
दो को ही बहुमत साबित करेंगे केजरीवाल
विधानसभा के सचिव पीएन मिश्रा का कहना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दो जनवरी को ही विश्वास मत हासिल करेंगे। केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय को प्रोटेम स्पीकर से विश्वास मत कराए जाने पर राय मांगी गई थी। केंद्र सरकार ने उस पर कोई राय नहीं दी है। ऐसे में कैबिनेट का जो फैसला है, उसी हिसाब से कार्यवाही चलेगी।
यानी एक जनवरी को सदस्य शपथ लेंगे, दो को विश्वास मत, तीन को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव, चार-पांच जनवरी को छुट्टी, 6 जनवरी को उपराज्यपाल का अभिभाषण और 7 जनवरी को उपराज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करके उसे पारित किया जाएगा।
मतीन अहमद होंगे प्रोटेम स्पीकर
प्रोटेम स्पीकर पर विपक्ष के असहयोग आंदोलन में केजरी सरकार फंस गई है। प्रोटेम स्पीकर बनने से सोमवार को अधिसूचित प्रो. जगदीश मुखी व उनकी पार्टी ने मना किया तो जेडीयू के एक मात्र विधायक शोएब इकबाल ने भी पद स्वीकार करने से मना कर दिया।
मजबूरी में आप सरकार के मंत्री मनीष सिसोदिया को कांग्रेस नेता से सहयोग मांगना पड़ा। उसके बाद पांच बार चुनाव जीत चुके विधायक चौधरी मतीन अहमद प्रोटेम स्पीकर बनने के लिए राजी हो गए हैं।
लेट हुई बस तो डिपो मैनेजर पर गिरेगी गाज
आप की सरकार बनते ही सरकारी महकमों में भाग-दौड़ और चुस्ती बढ़ गई है। डीटीसी की पहली महिला चेयरमैन देवाश्री मुखर्जी ने मंगलवार को सीनियर अधिकारियों की बैठक ली और तेजी से काम करने के निर्देश दिए। चेयरमैन ने साफ लहजे में कहा कि अगर यात्रियों को समय से बस नहीं मिलती, तो डिपो मैनेजर पर गाज गिर सकती है।
देवाश्री मुखर्जी ने बसों के रूटों की विस्तार से जानकारी देने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से हेल्पलाइन नंबर पर मिलने वाले सुझाव, शिकायत पुस्तिका, सुबह-शाम का ड्यूटी चार्ट, समय सारिणी और सुरक्षा-व्यवस्था की जानकारी भी मांगी है। सूत्रों के अनुसार केजरीवाल सरकार ने डीटीसी प्रबंधन को बता दिया है कि बसों के संचालन में किसी भी तरह की कोताही बरती गई और यात्रियों को असुविधा हुई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
संजय कुमार श्रीवास्तव होंगे दिल्ली के नए मुख्य सचिव
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संजय कुमार श्रीवास्तव दिल्ली के नए मुख्य सचिव होंगे। इस पद पर रहे डीएम सपोलिया का तबादला कर दिया गया है।
श्रीवास्तव भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1980 बैच के अधिकारी हैं। वे दिल्ली में डीडीए में उपाध्यक्ष के तौर पर काम कर चुके हैं। और फिलहाल वे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में तैनात थे। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के बाद केंद्र सरकार ने यह अहम फैसला किया है।
अस्पतालों में स्वास्थ्य मंत्री ने किया दौरा
दिल्ली के नए स्वास्थ्य मंत्री पदभार ग्रहण करने के बाद से लगातार दिल्ली सरकार के अस्पतालों का चक्कर काट रहे हैं। मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री पूर्वी दिल्ली के तीन अस्पतालों का दौरा कर वहां के मरीजों और डॉक्टरों की समस्या के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान स्वास्थ्य निदेशक डॉ. एन.वी.कामत भी साथ थे।
दिल्ली के नए स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन मंगलवार को सबसे पहले पूर्वी दिल्ली के हेडगेवार अस्पताल और इसके बाद इहबास और फिर दिल्ली राज्य कैंसर संस्थान का दौरा किया। अस्पताल में भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनकी समस्या जानी।
एक-एक बिस्तर पर दो-दो मरीज को देखकर स्वास्थ्य मंत्री ने चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया कि इस व्यवस्था में बदलाव जरूरी है। लिहाजा इसके लिए जो भी जरूरी कदम उठाये जा सकते हैं इसकी योजना तैयार करके सौंपी जाये। यही नहीं स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों की भी समस्या जानी और उसे दूर करने का भरोसा भी दिलाया।