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केजरीवाल ने सलमान खुर्शीद से पूछे 5 सवाल

नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Sun, 14 Oct 2012 03:09 PM IST
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arvind kejriwal five questions to salman khurshid

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केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी लुईस खुर्शीद के ट्रस्ट पर कथित रूप से विकलांगों के कल्याण की 71.5 लाख रुपए की सरकारी रकम हड़पने के संगीन आरोपों पर जारी सियासी घमासान और तेज हो गया है।
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अरविंद केजरीवाल ने मीडिया के माध्यम से सलमान खुर्शीद से 5 सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि  खुर्शीद को इन पांचों सवालों का जवाब देना चाहिए।

केजरीवाल ने कहा है कि वे इन सवालों के जवाब जरूर दें। केजरीवाल ने कहा कि सलमान खुर्शीद पर हमने आरोप नहीं लगाए हैं। सारे आरोप यूपी सरकार की जांच रिपोर्ट में लगाए गए हैं। लेकिन अब यूपी की अखिलेश सरकार कह रही है कि वह दोबारा इस मामले की जांच कराएगी।


पांच सवाल
1. आपकी संस्था ने भारत सरकार को उत्तर प्रदेश सरकार का एक पत्र पेश किया था, जिसमें 2009-10 में आपकी संस्था के काम को संतोषजनक बताते हुए आगे भी फंड देने की सिफारिश की गई है। इस पत्र पर यूपी सरकार के तत्कालीन स्पेशल सेक्रेटरी रामराज सिंह के हस्ताक्षर हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्ट में सिंह ने यह मानने से ही इनकार कर दिया कि पत्र में उनके हस्ताक्षर हैं। सिंह ने यह भी कहा कि यह पत्र 24 मार्च 2011 को लिखा गया जबकि वह तो जनवरी में ही रिटायर हो चुके थे। क्या आप मानते हैं कि आपकी संस्था ने रामराज सिंह का फर्जी पत्र दिखाकर अगले साल की ग्रांट लेने की कोशिश की थी?

2. आपकी संस्था ने यूपी सरकार के पूर्व सीडीओ जेबी सिंह की ओर से लिखा एक शपथ पत्र प्रस्तुत किया है, जिसमें सिंह आपकी संस्था के काम को अच्छा बता रहे हैं। लेकिन जेबी सिंह खुद ही यह कह चुके हैं कि इसमें उनके फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया। क्या आप मानते हैं कि जेबी सिंह का यह शपथ पत्र फर्जी है? अगर हां, तो आपने फर्जी शपथ पत्रा क्यों लगाया?

3. अखिलेश यादव सरकार ने 12 जून 2012 को केंद्र सरकार को लिखे पत्र में फर्जी हस्ताक्षर पर सवाल खड़े किए थे। आपके अनुसार यह दस्तावेज सही हैं या गलत?

4. आपकी संस्था ने दावा किया है कि आपने कई जिलों में अलग-अलग तारीख को विकलांग कैंप लगाकर उन्हें सामान बांटा था। यूपी सरकार की जांच के अनुसार उन तारीखों में न तो कैंप लगे और न ही सामान बांटा गया। क्या आप 12 जून 2012 के उत्तर प्रदेश सरकार के इस पत्र में लिखी बातों से सहमत हैं?

5. आपकी संस्था की लाभार्थियों की सूची में ऐसे कई विकलांग हैं जिनका कहना है कि उन्हें तो आपसे कोई सामान नहीं मिला। जबकि आपकी संस्था कहती है कि उन्हें सामान दिया गया। यदि उनमें से कुछ लाभार्थी सार्वजनिक तौर पर यह कहते हैं कि उन्हें सामान नहीं मिला। तो क्या आप कानून मंत्री के पद से इस्तीफा देकर राजनीति से संन्यास ले लेंगे?

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