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यूपीपीएससी के टॉपर अरविंद का लक्ष्य है आईएएस बनना
गाजियाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 11 Oct 2012 02:00 AM IST
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महानगर के अरविंद कुमार सिंह ने युवाओं को एक नई राह दिखा दी। यूपीएससी और यूपीपीएससी परीक्षाओं में कई प्रयासों के बाद असफलता के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बुधवार को घोषित यूपीपीएससी परिणाम में गाजियाबाद का नाम सबसे ऊपर कर दिया। अरविंद कुमार सिंह ने अपने दूसरे ही प्रयास में न केवल यूपीपीएससी क्वालीफाई किया बल्कि टॉप कर डाला।
पीसीएस बनने के पीछे अरविंद का सफर काफी उतार चढ़ाव वाला रहा है। शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाने के सपने देखने वाले अरविंद ने रामपुर से दसवीं और बारहवीं की परीक्षा सम्मान सहित उत्तीर्ण की। इसके बाद 2005 में आइडियल इंस्टीट्यूट इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन में बीटेक करने के बाद तीन बार आईएएस का मेंस क्वालीफाई किया लेकिन सफलता नहीं मिली।
इसके बाद उन्होंने यूपीपीएससी की ओर देखा और 2009 में मेंस क्लीयर किया और 2010 की यूपीपीएससी परीक्षा में टॉप कर लिया। प्रतिदिन 15 घंटे तक पढ़ाई करने वाले अरविंद को परिवार की ओर से पूरा सपोर्ट मिला। अरविंद ने कहा, ‘मैं सामाजिक था लेकिन मैंने दोस्त कम बनाए। मैं शुरू से ही प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहता था और अपने लक्ष्य का हासिल कर लिया।’
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परिणाम जारी हुआ तो आईएएस परीक्षा दे रहे थे अरविंद
जिस वक्त यूपीपीएससी परिणाम जारी हुआ उस समय अरविंद इलाहाबाद में संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा दे रहे थे। फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि यह सफलता कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से मिली है। कृषि विभाग में सेकेंड ऑफिसर अरविंद के पिता कैलाश चंद्र ने कहा कि उनको यकीन था कि अरविंद टॉप करेगा।
मैं बहुत खुश हूं। मेरे बेटे ने कड़ी मेहनत के दम पर यूपीपीएसी में यह सफलता हासिल की है। मैं भगवान से प्रार्थना करतीं हूं कि वह आईएएस बने। इस बार आईएएस परीक्षा में उसका अंतिम मौका है। - राजेश, अरविंद की मां
अरविंद को कई बार असफलता मिली लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया। कड़ी मेहनत, लगन के दम पर उन्होंने यह सफलता पाई है। आईएएस की मुख्य परीक्षा दे रहे हैं और पूरी उम्मीद है कि वे आईएएस बनेंगे। - प्रीति, भाभी
मैं प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से बस इतना कहूंगा कि धैर्य न खोएं। मेहनत से पढ़ाई करें और लक्ष्य पर नजर रखें। इससे सफलता मिलनी तय है। कभी भी असफलताओं से घबराएं नहीं और निश्चयपूर्वक अध्ययन जारी रखें। - अरविंद सिंह
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पीसीएस बनने के पीछे अरविंद का सफर काफी उतार चढ़ाव वाला रहा है। शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाने के सपने देखने वाले अरविंद ने रामपुर से दसवीं और बारहवीं की परीक्षा सम्मान सहित उत्तीर्ण की। इसके बाद 2005 में आइडियल इंस्टीट्यूट इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन में बीटेक करने के बाद तीन बार आईएएस का मेंस क्वालीफाई किया लेकिन सफलता नहीं मिली।
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इसके बाद उन्होंने यूपीपीएससी की ओर देखा और 2009 में मेंस क्लीयर किया और 2010 की यूपीपीएससी परीक्षा में टॉप कर लिया। प्रतिदिन 15 घंटे तक पढ़ाई करने वाले अरविंद को परिवार की ओर से पूरा सपोर्ट मिला। अरविंद ने कहा, ‘मैं सामाजिक था लेकिन मैंने दोस्त कम बनाए। मैं शुरू से ही प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहता था और अपने लक्ष्य का हासिल कर लिया।’
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परिणाम जारी हुआ तो आईएएस परीक्षा दे रहे थे अरविंद
जिस वक्त यूपीपीएससी परिणाम जारी हुआ उस समय अरविंद इलाहाबाद में संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा दे रहे थे। फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि यह सफलता कड़ी मेहनत और परिवार के सहयोग से मिली है। कृषि विभाग में सेकेंड ऑफिसर अरविंद के पिता कैलाश चंद्र ने कहा कि उनको यकीन था कि अरविंद टॉप करेगा।
मैं बहुत खुश हूं। मेरे बेटे ने कड़ी मेहनत के दम पर यूपीपीएसी में यह सफलता हासिल की है। मैं भगवान से प्रार्थना करतीं हूं कि वह आईएएस बने। इस बार आईएएस परीक्षा में उसका अंतिम मौका है। - राजेश, अरविंद की मां
अरविंद को कई बार असफलता मिली लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया। कड़ी मेहनत, लगन के दम पर उन्होंने यह सफलता पाई है। आईएएस की मुख्य परीक्षा दे रहे हैं और पूरी उम्मीद है कि वे आईएएस बनेंगे। - प्रीति, भाभी
मैं प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से बस इतना कहूंगा कि धैर्य न खोएं। मेहनत से पढ़ाई करें और लक्ष्य पर नजर रखें। इससे सफलता मिलनी तय है। कभी भी असफलताओं से घबराएं नहीं और निश्चयपूर्वक अध्ययन जारी रखें। - अरविंद सिंह